हंस-क्षीर न्याय की तरह करें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का उपयोग-डॉ।शिवानंद एस।रुमा।
हंस-क्षीर न्याय की तरह करें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का उपयोग - डॉ. शिवानंद एस. रुम्म
कलबुर्गी: "आज के प्रतिस्पर्धी युग में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का उपयोग अनिवार्य है। जिस प्रकार हंस दूध और पानी को अलग कर देता है, उसी प्रकार हमें भी विवेकपूर्ण तरीके से एआई का उपयोग करना चाहिए," यह विचार गुलबर्गा विश्वविद्यालय के कंप्यूटर विज्ञान विभाग के प्रमुख डॉ. शिवानंद एस. रुम्म ने व्यक्त किए।
वे न डिग्री कॉलेज के IQAC सहयोग से आयोजित "भौतिक और जीवन विज्ञान में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और उसके अनुप्रयोग" विषय पर एक दिवसीय राज्य स्तरीय संगोष्ठी का उद्घाटन करते हुए बोल रहे थे। उन्होंने आगे कहा कि एआई वर्तमान जरूरतों को पूरा करने का एक साधन है, लेकिन इसका उपयोग अत्यंत सावधानी और सतर्कता के साथ किया जाना चाहिए।
प्रमुख बिंदु:
डॉ. मीना पत्की देशपांडे (अध्यक्ष, नूतन विद्यालय शैक्षणिक बोर्ड): कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए उन्होंने कहा कि एआई के बारे में समाज में भले ही मतभेद हों, लेकिन यह मानव जाति के लिए अत्यंत उपयोगी है।
डॉ. मल्लिकार्जुन हंगार्गे (सेवानिवृत्त प्राचार्य, कर्नाटक कॉलेज, बीदर): प्रथम सत्र में "भौतिक विज्ञान में एआई" पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि इसके निर्माता हम ही हैं, अतः इसका लाभ हमारे उपयोग करने के तरीके पर निर्भर करता है। भविष्य में यह रोजगार के नए अवसर पैदा करने की क्षमता रखता है।
डॉ. शिवानंद एस. गोर्णाले (रानी चेन्नम्मा विश्वविद्यालय, बेलगावी): दूसरे सत्र में "जीवन विज्ञान में एआई" विषय पर जानकारी देते हुए उन्होंने जीव विज्ञान की शिक्षा में एआई के प्रभावी उपयोग के बारे में विस्तार से बताया।
विवरण:
इस संगोष्ठी में राज्य के विभिन्न हिस्सों से छात्रों, शिक्षकों, शोधकर्ताओं और विज्ञान प्रेमियों ने भाग लिया और एआई के नवीनतम विकास पर चर्चा की।
कार्यक्रम की शुरुआत महाविद्यालय के संगीत विभाग द्वारा प्रार्थना गीत से हुई। प्राचार्य डॉ. दयानंद एम. शास्त्री ने अतिथियों का स्वागत किया, जबकि महाविद्यालय के निदेशक प्रो. गोविंद पुजार ने प्रास्ताविक भाषण दिया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. विष्णु गुंडगुर्ती ने किया।