मातृभूमि की आन-बान और स्वाभिमान के प्रतीक थे महाराणा प्रताप
मातृभूमि की आन-बान और स्वाभिमान के प्रतीक थे महाराणा प्रताप
लोकेशन धामनोद
धार जिले के धामनोद स्थित हाउसिंग बोर्ड वीर सावरकर नगर में वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप सिंह जी की जयंती बड़े हर्षोल्लास और उत्साह के साथ मनाई गई। कार्यक्रम का आयोजन करणी सेना जिला अध्यक्ष ठाकुर विशाल सिंह मंडलोई के नेतृत्व में किया गया। इस अवसर पर महाराणा प्रताप जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण, दीप प्रज्वलन एवं पूजन कर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया गया।
यह आयोजन करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री सूरजपाल सिंह अम्मू के आह्वान, प्रदेश अध्यक्ष श्री योगेंद्र सिंह डोडिया के मार्गदर्शन एवं प्रदेश उपाध्यक्ष श्री किशन लाल जांगिड़ (उपाध्यक्ष विचार मंथन) की प्रेरणा से संपन्न हुआ। कार्यक्रम में करणी सेना संगठन एवं राजपूत समाज के पदाधिकारियों और युवाओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।
कार्यक्रम में उपस्थित समाजजनों एवं युवाओं को संबोधित करते हुए वरिष्ठ संरक्षक मनोज नाहर ने महाराणा प्रताप के संघर्ष, वीरता और राष्ट्रभक्ति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि महाराणा प्रताप ने मातृभूमि मेवाड़ की स्वतंत्रता और स्वाभिमान की रक्षा के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर दिया। उन्होंने अकबर की अधीनता स्वीकार करने के बजाय जंगलों में रहना और घास की रोटियां खाना स्वीकार किया, लेकिन कभी अपने स्वाभिमान से समझौता नहीं किया।
हल्दीघाटी युद्ध का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि सीमित संसाधनों के बावजूद महाराणा प्रताप ने अदम्य साहस के साथ मुगलों का सामना किया। उनका प्रिय घोड़ा चेतक आज भी वीरता और निष्ठा का प्रतीक माना जाता है।
विशेष बात यह रही कि लंबे समय से उपेक्षित हो रही महाराणा प्रताप जी की प्रतिमा को करणी सेना के कार्यकर्ताओं ने रंग-रोगन कर नया एवं आकर्षक स्वरूप प्रदान किया। कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों ने महाराणा प्रताप के आदर्शों पर चलने तथा राष्ट्रभक्ति एवं समाज सेवा का संकल्प लिया।
कार्यक्रम में धर्मेंद्र सिंह मंडलोई, सुनील कुमार दर्शे, कमलेश दरबार, कमल सिंह सोलंकी, आनंद सिंह ठाकुर, ओमप्रकाश कुशवाह, जितेंद्र सोनी, सुनील दरबार, कुणाल सिंह चौहान, दीपक सिंह सोलंकी, राहुल सिंह तंवर, रोहित सिंह मंडलोई, शिवम राजपूत, संजय सिंह सिसोदिया, राजेंद्र सिंह चौहान सहित बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का संचालन राजेंद्र सिंह चौहान (कोठड़ा) ने किया एवं आभार संजय सिंह सिसोदिया (दरबार) ने व्यक्त किया।
जय महाराणा जय राजपूताना