करोड़ों की घोषणाओं के बीच देवबंद की बड़ी उम्मीदें हुईं धराशायी विकास के दावों के बीच 'फतवा' और 'ध्रुवीकरण' का तड़का
युवाओं को खेल का मैदान नहीं, सिर्फ भाषण मिला
ट्रॉमा सेंटर, डिग्री कॉलेज और जिला बनाने की मांग फिर अधूरी
देवबंद | रिपोर्ट: Rao Shokeen
Rao Digital India News
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का 7 मई 2026 को देवबंद के जड़ौदा जट्ट में हुआ दौरा कागजों पर भले ही करोड़ों की सौगात वाला नजर आया हो, लेकिन स्थानीय लोगों के अनुसार जमीनी स्तर पर यह ऊंट के मुंह में जीरा साबित हुआ। मुख्यमंत्री ने देवबंद विधानसभा के लिए 523.27 करोड़ की परियोजनाओं की घोषणा की, लेकिन क्षेत्र की वर्षों पुरानी प्रमुख मांगों पर कोई ठोस घोषणा नहीं की गई।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में देवबंद की पहचान को फतवों से जोड़ते हुए राजनीतिक और धार्मिक मुद्दों को भी छुआ। स्थानीय लोगों का कहना है कि चुनावी माहौल में विकास के साथ हिंदू-मुस्लिम ध्रुवीकरण का तड़का लगाकर असली समस्याओं से ध्यान भटकाने की कोशिश की गई।
देवबंद को जिला बनाने की मांग फिर अधूरी
लंबे समय से देवबंद को अलग जनपद बनाने की मांग उठती रही है। क्षेत्रवासियों को उम्मीद थी कि मुख्यमंत्री इस दिशा में कोई संकेत देंगे, लेकिन भाषण में इसका जिक्र तक नहीं हुआ।
किसानों को फिर मिला सिर्फ आश्वासन
गन्ना बाहुल्य क्षेत्र होने के बावजूद न तो किसी बड़े कृषि आधारित उद्योग की घोषणा हुई और न ही गन्ना भुगतान व मूल्य वृद्धि पर कोई ठोस समाधान सामने आया। किसान नेताओं को प्रशासन द्वारा नजरबंद किए जाने से नाराजगी और बढ़ गई।
स्वास्थ्य और शिक्षा पर चुप्पी
देवबंद आज भी ट्रॉमा सेंटर और मल्टी-स्पेशलिटी अस्पताल जैसी सुविधाओं से वंचित है। गंभीर मरीजों को सहारनपुर, मेरठ और दिल्ली का रुख करना पड़ता है। वहीं युवाओं के लिए राजकीय डिग्री कॉलेज की मांग भी अधूरी रह गई।
खेल प्रतिभाओं को नहीं मिला मंच
आधुनिक स्पोर्ट्स स्टेडियम और खेल परिसर की मांग पर भी कोई घोषणा नहीं हुई, जिससे युवाओं में निराशा देखी गई।
हालांकि मुख्यमंत्री ने श्री त्रिपुर मां बाला सुंदरी देवी मंदिर को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने और मंदिर मार्ग के सुदृढ़ीकरण की बात कही, लेकिन स्थानीय बुद्धिजीवियों का कहना है कि केवल सौंदर्यीकरण से क्षेत्र की मूल समस्याएं हल नहीं होंगी। जनता को अब भी रोजगार, स्वास्थ्य, शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं के ठोस समाधान का इंतजार है।
Reporter: Rao Shokeen
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