हरियाणा में रिटायरमेंट और ट्रांसफर के नियम बदले, रिटायरमेंट करीब तो 5 साल से ज्यादा एक ही जगह पर रुक सकेंगे
हरियाणा सरकार ने साफ किया है कि अब उन कर्मचारियों का ट्रांसफर नहीं होगा, जिनके रिटायरमेंट में एक साल से कम का समय बचा है। अगर कोई कर्मचारी खुद अपनी जगह बदलता है तो उसे आधिकारिक ट्रांसफर नहीं माना जाएगा।
हरियाणा सरकार ने 1988 के नियमों में बदलाव करते हुए ट्रांसफर और रिटायरमेंट प्रक्रिया में बदलाव किया है। इसका असर उन कर्मचारियों पर होगा, जिनके रिटायरमेंट में एक साल से कम का समय बचा है। सरकार के पुराने नियमों के अनुसार ऐसे कर्मचारियों को आमतौर पर ट्रांसफर प्रक्रिया में शामिल नहीं किया जाता था, लेकिन जरूरत पड़ने पर इन कर्मचारियों का भी ट्रांसफर किया जा सकता था। अब इस नियम को खत्म कर दिया गया है।नियमों के अनुसार जिन कर्मचारियों का कार्यकाल एक साल से कम बचा है। उनको उनकी पंसद के अनुसार किसी भी स्टेशन में ट्रांसफर किया जा सकता है, लेकिन इसके लिए खुद कर्मचारी को पहल करनी होगी। खास बात यह है कि इस ट्रांसफर को आधिकारिक ट्रांसफर नहीं माना जाएगा। इस वजह से कर्मचारी को ट्रांसफर के लिए मिलने वाली छु्ट्टियां और टीए/डीए का लाभ नहीं मिलेगा।
5 साल से अधिक कार्यकाल की छूट
अब केवल उन कर्मचारियों को ही एक जगह पर 5 साल से ज्यादा रहने की छूट मिलेगी, जिनकी रिटायरमेंट में 1 साल या उससे कम समय बचा हो। अगर रिटायरमेंट में 1 साल से ज्यादा समय बचा है, तो यह छूट नहीं मिलेगी। कुछ शर्तों के साथ ट्रांसफर हो सकता है, लेकिन इसे आधिकारिक ट्रांसफर नहीं माना जाएगा। ऐसे ट्रांसफर पर कर्मचारी को यात्रा भत्ता और जॉइनिंग टाइम का कोई फायदा नहीं मिलेगा।
1988 के नियम में बदलाव
यह बदलाव 1988 के पुराने निर्देश में किया गया है। मानव संसाधव विभाग ने सभी प्रशासनिक सचिवों, विभागों, निगमों और डिप्टी कमिश्नरों को आदेश जारी कर दिए हैं। हरियाणा में करीब 3.25 लाख रेगुलर कर्मचारी हैं। यह नियम उन कर्मचारियों पर लागू होगा जो रिटायरमेंट के करीब हैं। रिटायरमेंट में 1 साल से कम बचा हो तो जबरन ट्रांसफर नहीं होता था और पसंद की पोस्टिंग का विकल्प मिलता था।