सुप्रीम कोर्ट ने जमानतदारों की संख्या सीमित करने का निर्णय दिया
उत्तर प्रदेश: सुप्रीम कोर्ट ने हनी निषाद उर्फ मोहम्मद इमरान उर्फ विक्की बनाम उत्तर प्रदेश राज्य मामले में यह निर्णय दिया कि यदि किसी अभियुक्त को कई मामलों में पहले ही जमानत मिल चुकी है, तो हर मुकदमे में अलग-अलग जमानतदार मांगना व्यावहारिक रूप से कठिन और अनुचित है। अदालतों को न्यायसंगत और व्यवहारिक दृष्टिकोण अपनाते हुए अभियुक्त को एक ही व्यक्तिगत बांड और सीमित संख्या में जमानतदार प्रस्तुत करने की अनुमति दी जानी चाहिए।
इस फैसले के अनुसार, 31 अलग-अलग मामलों के लिए बार-बार नए जमानतदार देने की आवश्यकता नहीं होगी। इस निर्णय का कानूनी महत्व तब और बढ़ गया जब इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने राजीव निषाद मामले में सभी 9 मामलों के लिए एक ही बांड और दो जमानतदार स्वीकार करने का आदेश दिया। यह निर्णय खासकर उन मामलों में उपयोगी है जहाँ आरोपी गरीब हो और हर केस में अलग-अलग जमानतदार पेश करना असंभव हो।