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ग्राउंड रिपोर्ट: विकास की धूल में गुम होता जसूर का व्यापार

स्थान: जसूर, जिला कांगड़ा (हिमाचल प्रदेश)
विषय: फोरलेन निर्माण के कारण व्यापारियों और आम जनता की बदहाली
[प्रस्तावना]
जसूर, जिसे कभी कांगड़ा जिले का एक प्रमुख व्यापारिक केंद्र माना जाता था, आज विकास की "धूल" के नीचे दबा हुआ महसूस कर रहा है। मंडी-पठानकोट नेशनल हाईवे (NH-154) को फोरलेन में बदलने का कार्य प्रगति पर तो है, लेकिन इसकी धीमी गति और कुप्रबंधन ने जसूर कस्बे के बाजार का हुलिया बिगाड़ कर रख दिया है।
प्रमुख समस्याएं: धूल, गड्ढे और ठप कारोबार
व्यापार पर संकट: बाजार के बीचों-बीच चल रहे खुदाई के काम ने ग्राहकों को दुकान की दहलीज से दूर कर दिया है। व्यापारियों का कहना है कि उनकी बिक्री 70% से 80% तक गिर गई है।
धूल का साम्राज्य: दिन भर उड़ती धूल ने न केवल दुकानों में रखे सामान को खराब कर दिया है, बल्कि व्यापारियों और ग्राहकों के स्वास्थ्य पर भी बुरा असर डाल रही है। सांस की बीमारियों और आंखों में जलन की शिकायतें आम हो गई हैं।
सड़क की खस्ता हालत: बड़े-बड़े गड्ढों और अव्यवस्थित मलबे के कारण आए दिन ट्रैफिक जाम लगा रहता है, जिससे जसूर बाजार से गुजरना किसी चुनौती से कम नहीं है।
व्यापारियों का दर्द (बयान)
"दुकान खोलते ही धूल जमना शुरू हो जाती है। ग्राहक अब यहां रुकना नहीं चाहते। अगर यही हाल रहा, तो हमें रोजी-रोटी के लाले पड़ जाएंगे। प्रशासन को कम से कम नियमित पानी के छिड़काव की व्यवस्था तो करनी चाहिए।"
स्थानीय दुकानदार
प्रशासन से मांग
स्थानीय व्यापार मंडल और निवासियों ने प्रशासन से निम्नलिखित राहत की मांग की है:
नियमित जलापूर्ति: धूल को नियंत्रित करने के लिए दिन में कम से कम 4-5 बार पानी का छिड़काव हो।
काम में तेजी: निर्माण कार्य को तय समय सीमा के भीतर पूरा किया जाए।
सुगम मार्ग: पैदल चलने वालों और वाहनों के लिए वैकल्पिक या साफ रास्तों का प्रबंध हो।
निष्कर्ष:
निस्संदेह फोरलेन का निर्माण भविष्य के लिए सुखद है, लेकिन वर्तमान में जसूर के व्यापारियों का "वर्तमान" दांव पर लगा है। सरकार और निर्माण कंपनी को बीच का रास्ता निकालना होगा ताकि विकास के नाम पर विनाश की यह धूल शांत हो सके।

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