मुख्य न्यायाधीश से सहारा के संरक्षण की अपील
यह अपील मुख्य न्यायाधीश महोदय को संबोधित है जिसमें 'सहारा' संस्था के संरक्षण की मांग की गई है। 6 सितंबर 2025 के बाद सहारा की आत्मसमर्पण प्रक्रिया और सहारा-अदानी डील से निवेशकों और कार्यकर्ताओं में चिंता और असुरक्षा की भावना उत्पन्न हुई है। यह संस्था करोड़ों गरीब, मध्यम वर्गीय, मजदूर, किसान, महिलाओं और बुजुर्गों की मेहनत की कमाई से जुड़ी है, जिसने रोजगार दिया और आर्थिक गतिविधियों को गांव-गांव तक पहुँचाया।
अपील में कहा गया है कि यदि कहीं गलतियां हुई हैं तो कानून के अनुसार सुधार और जवाबदेही होनी चाहिए, लेकिन संस्था को समाप्त कर देना करोड़ों जमाकर्ताओं और कर्मचारियों के भविष्य को धुंधला कर देगा। जनता न्यायपालिका में विश्वास रखती है और मुख्य न्यायाधीश से न्यायपूर्ण निर्णय की उम्मीद करती है ताकि सहारा को सुरक्षा, अधिकार और जिम्मेदारी दी जा सके। इस निर्णय से करोड़ों लोगों के जीवन में सुधार संभव है।