संभल में स्वास्थ्य विभाग पर गंभीर सवालपंजीकरण सलमान अकरम के नाम, अस्पताल चला रहे कथित झोलाछाप!शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं, क्या CMO कार्यालय की म
संभल में स्वास्थ्य विभाग पर गंभीर सवाल
पंजीकरण सलमान अकरम के नाम, अस्पताल चला रहे कथित झोलाछाप!
शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं, क्या CMO कार्यालय की मिलीभगत?
संभल। जनपद संभल में संचालित कथित अल शिफा हॉस्पिटल को लेकर स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े हो गए हैं। आरोप है कि सीएमओ कार्यालय के संबंधित अधिकारियों ने सभी नियमों और नैतिक जिम्मेदारियों को ताक पर रखकर सलमान अकरम पुत्र रजिया अकरम के नाम पर अस्पताल का पंजीकरण जारी कर दिया, जबकि बताया जा रहा है कि सलमान अकरम स्वयं शहर से बाहर किसी दूसरे अस्पताल में नौकरी कर रहा है।
स्थानीय लोगों एवं शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि उसकी अनुपस्थिति में अस्पताल का संचालन कथित रूप से बिना डिग्री एवं बिना वैध चिकित्सीय योग्यता वाले झोलाछाप लोगों द्वारा किया जा रहा है। इससे मरीजों, विशेषकर गर्भवती महिलाओं और नवजात बच्चों की जान को गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है।
अगर जच्चा-बच्चा की मौत हुई तो जिम्मेदार कौन?
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यदि अस्पताल में इलाज के दौरान किसी जच्चा-बच्चा या अन्य मरीज की मृत्यु होती है, तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? शिकायतकर्ताओं का कहना है कि ऐसी किसी भी अप्रिय घटना के लिए सीधे तौर पर संबंधित सीएमओ कार्यालय के अधिकारी जिम्मेदार होने चाहिए, जिन्होंने कथित अनियमितताओं के बावजूद पंजीकरण जारी किया और बार-बार शिकायतों के बाद भी कार्रवाई नहीं की।
लगातार शिकायतों के बाद भी चुप्पी
बताया जा रहा है कि इस मामले में कई बार प्रशासनिक एवं स्वास्थ्य विभागीय अधिकारियों को लिखित शिकायतें भेजी गईं, लेकिन अब तक कोई प्रभावी जांच या कठोर कार्रवाई सामने नहीं आई। इससे लोगों में यह चर्चा तेज हो गई है कि कहीं न कहीं विभागीय संरक्षण और मिलीभगत के कारण यह पूरा खेल जारी है।
जनता ने उठाए तीखे सवाल
क्या बिना उपस्थित चिकित्सक के अस्पताल चलाना नियमों के अनुरूप है?
क्या पंजीकरण जारी करने से पहले वास्तविक सत्यापन किया गया था?
क्या स्वास्थ्य विभाग केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित रह गया है?
क्या गरीब मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ करने वालों पर कार्रवाई होगी?
उच्चस्तरीय जांच की मांग
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने जिलाधिकारी संभल, स्वास्थ्य विभाग उत्तर प्रदेश तथा शासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और यदि आरोप सही पाए जाएं तो संबंधित अधिकारियों, अस्पताल संचालकों एवं कथित फर्जी चिकित्सा संचालन में शामिल लोगों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।