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क्या थलापति विजय और राहुल गांधी की जुगलबंदी से बदलेगा दक्षिण का इतिहास ?

तमिलनाडु की राजनीतिक रणभूमि में इस समय एक ऐसी लहर उठ रही है जिसने दशकों पुराने द्रविड़ समीकरणों को हिलाकर रख दिया है, क्योंकि अभिनेता से राजनेता बने थलापति विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) अब कांग्रेस के खुले और सशर्त समर्थन के साथ सरकार बनाने की दहलीज पर खड़ी है। इस ऐतिहासिक मोड़ पर न केवल तमिलनाडु बल्कि पूरे देश की नजरें टिकी हुई हैं क्योंकि खबर यह है कि कांग्रेस के दिग्गज नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी खुद विजय के शपथ ग्रहण समारोह में शिरकत कर सकते हैं, जो दक्षिण की राजनीति में 'हाथ' और 'थलापति' के एक नए और शक्तिशाली गठबंधन का संकेत है। हालिया चुनाव परिणामों के बाद, जहाँ TVK 100 से अधिक सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है, विजय के पिता एस.ए. चंद्रशेखर ने कांग्रेस को गठबंधन का खुला न्योता देकर सियासी हलचल तेज कर दी थी, जिसके बाद कांग्रेस आलाकमान ने गहन विचार-विमर्श के बाद विजय को सशर्त समर्थन देने का फैसला किया है।



इस समर्थन के पीछे न केवल सत्ता की गणित है, बल्कि एक गहरी वैचारिक समानता भी देखी जा रही है; जहाँ विजय ने अपनी पार्टी की विचारधारा में धर्मनिरपेक्षता और सामाजिक न्याय को प्राथमिकता दी है, वहीं राहुल गांधी ने भी फोन पर विजय को उनकी शानदार जीत की बधाई देते हुए इसे "युवाओं की आवाज" करार दिया है।



DMK और AIADMK जैसी पारंपरिक पार्टियों के लिए यह गठबंधन एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है, विशेष रूप से तब जब कांग्रेस ने कैबिनेट पदों और बोर्ड की अध्यक्षता जैसे विशिष्ट शर्तों के साथ विजय का साथ देने का मन बना लिया है।

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