मेवात के इस्लामुद्दीन: संघर्ष और साहस की मिसाल
मेवात: रूपड़ाका गाँव के इस्लामुद्दीन का जीवन संघर्ष, साहस और जनसेवा का प्रतीक था। एक साधारण किसान परिवार से निकलकर सेना, नौकरी और जन आंदोलनों के माध्यम से उन्होंने अन्याय के खिलाफ लड़ाई लड़ी। 1975 के आपातकाल में जेल, नौकरी से बर्खास्तगी और पुलिस अत्याचारों ने उनके हौसले को कमजोर नहीं किया बल्कि मजबूत किया।
नूंह बस स्टैंड की छोटी चाय की दुकान से उन्होंने मेवात के युवाओं, छात्रों और कर्मचारियों की आवाज उठाई। दो-दो एफआईआर, अमानवीय यातनाएँ और सार्वजनिक अपमान के बावजूद उन्होंने यूनियन के निर्भीक नेता के रूप में कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा की और शिक्षा, स्वास्थ्य व सामाजिक न्याय के लिए सक्रिय रहे। राजनीति में कदम रखने के बावजूद पद से अधिक संघर्ष और सिद्धांत उन्हें महत्वपूर्ण रहे। अंततः कैंसर ने उनका जीवन समाप्त किया, लेकिन उनकी जुझारू आत्मा आज भी प्रेरणा देती है।