कागज़ों में स्मार्ट, ज़मीन पर अंधकारजर्जर बिजली व्यवस्था बनी मौत का जाल
मिर्जापुर (पड़री/चुनार):- मिर्ज़ापुर चुनार क्षेत्र के पिरल्लीपुर विद्युत केंद्र से जुड़े 33kV/11kV उपकेंद्र तक बिजली आपूर्ति में रोजाना फॉल्ट अब सिस्टम की नाकामी का स्थायी प्रतीक बन चुका है। करीब 15 किलोमीटर दूर स्थित इस केंद्र पर बिजलीकर्मियों के लिए बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है, जिसके चलते मामूली खराबी भी 1 घंटे नहीं, बल्कि 3-3 घंटे तक ठीक नहीं हो पाती। सवाल सीधा हैजब व्यवस्था इतनी जर्जर है, तो जिम्मेदार अधिकारी आखिर मौन क्यों हैं?
33kV, 11kV और LT लाइनों में लगातार हो रहे फॉल्ट ने पूरी बिजली आपूर्ति को चरमराकर रख दिया है। उपभोक्ता घंटों इंतजार करते हैं, कई बार पूरा दिन अंधेरे में गुजरता है, और LT लाइन में तो दो-दो दिन तक बिजली गायब रहना आम बात हो गई है। यह अब केवल असुविधा नहीं, बल्कि सीधा जनजीवन पर हमला है।
गांवों की गलियों और खेतों में फैली नंगी और जर्जर तारें खुलेआम मौत का जाल बन चुकी हैं। करंट गिरने से घर जल रहे हैं, किसानों की फसलें राख हो रही हैं, और पशुओं की मौतें रोजमर्रा की खबर बनती जा रही हैं। आम आदमी हर पल खतरे के बीच जी रहा हैयह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि व्यवस्था की घातक विफलता है।
सबसे बड़ा सवालबार-बार फॉल्ट हो रहे हैं, लेकिन स्थायी समाधान क्यों नहीं? जिम्मेदार अधिकारी चुप क्यों हैं? फोन, टोल-फ्री और शिकायत पोर्टलसब केवल खानापूर्ति बनकर रह गए हैं। जनता की आवाज दबाई जा रही है या अनसुनी की जा रही हैयह अब जांच का विषय होना चाहिए।
इसी बीच स्मार्ट मीटर जैसी योजनाओं का शोर मचाया जा रहा है। जनता का तीखा सवाल
जब बिजली की लाइन ही सुरक्षित नहीं, तो स्मार्ट मीटर किस काम का?
बिजलीकर्मी भी इस बदहाल सिस्टम में पिस रहे हैं। डिजिटल हाजिरी अनिवार्य है, लेकिन मौके पर न वाहन, न उपकरण, न स्टाफऐसे में मरम्मत कैसे होगी? नतीजाछोटी खराबी भी बड़ी समस्या बन जाती है और पूरा इलाका अंधेरे में डूब जाता है।
जनता की मांगे :-
जर्जर और नंगी तारों को तुरंत हटाकर सुरक्षित नेटवर्क बनाया जाए
33kV/11kV/LT लाइनों के फॉल्ट का स्थायी समाधान किया जाए
ग्रामीण क्षेत्रों में नियमित मेंटेनेंस और निगरानी सुनिश्चित हो
बिजलीकर्मियों को पर्याप्त संसाधन और सुविधाएं दी जाएं
पहले सुरक्षा, फिर स्मार्ट योजनाएं लागू की जाएं
जब तक बिजली व्यवस्था सुरक्षित, स्थिर और जवाबदेह नहीं बनती, तब तक स्मार्ट योजनाएं सिर्फ दिखावा हैं। और यह दिखावा अब सीधे-सीधे जनता की जान, संपत्ति और आजीविका पर भारी पड़ रहा है।
अब भी अगर सिस्टम नहीं जागातो यह लापरवाही नहीं, बल्कि अपराध मानी जाएगीl