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“डासना जिला कारागार बना ‘संस्कार और सुधार का केंद्र’ — नवग्रह वाटिका, गांधी व संगीत गैलरी का लोकार्पण”

गाजियाबाद। डासना क्षेत्र स्थित जिला कारागार में परम पूज्य स्वामी अवधेशानंद गिरि जी महाराज (जूना पीठाधीश्वर, आचार्य महामंडलेश्वर) एवं प्रमुख सचिव कारागार अनिल गर्ग द्वारा कारागार परिसर में नवनिर्मित नवग्रह वाटिका, गांधी गैलरी एवं संगीत गैलरी का विधिवत उद्घाटन किया गया। इस अवसर पर दोनों विशिष्ट अतिथियों ने कारागार का विस्तृत भ्रमण भी किया।
कारागार पहुंचने पर मुख्य द्वार पर शंखनाद के साथ स्वामी जी का भव्य स्वागत किया गया, जबकि प्रमुख सचिव को गार्ड ऑफ ऑनर प्रदान किया गया। जेल अधीक्षक सीताराम शर्मा ने पुष्पगुच्छ भेंट कर अतिथियों का स्वागत किया।
भ्रमण के दौरान स्वामी जी एवं प्रमुख सचिव ने कारागार की साज-सज्जा एवं बंदियों द्वारा बनाई गई कलाकृतियों की सराहना की। इसके पश्चात महिला अहाते का निरीक्षण करते हुए महिला बंदियों से संवाद किया गया। स्वामी जी ने महिला बंदियों के लिए संचालित कौशल विकास कार्यक्रमों की प्रशंसा की तथा उनके साथ रह रहे बच्चों को फल, मिष्ठान, कॉपी एवं पेंसिल वितरित किए। बच्चों ने गायत्री मंत्र एवं कविताएं सुनाकर सभी का मन मोह लिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ नवग्रह वाटिका के शिलापट्ट के अनावरण से हुआ। वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच स्वामी जी एवं अन्य अधिकारियों ने विशेष पौधों का रोपण किया। इस वाटिका का उद्देश्य कारागार परिसर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार तथा बंदियों के बीच प्रेम, सद्भाव और मानसिक शांति को बढ़ावा देना है।
इसके उपरांत कारागार स्थित डॉ. सम्पूर्णानंद पुस्तकालय में गांधी गैलरी का उद्घाटन किया गया। इस गैलरी में महात्मा गांधी के जीवन, उनके विचारों एवं आंदोलनों से संबंधित पुस्तकें, चरखा तथा बंदियों द्वारा बनाई गई पेंटिंग्स प्रदर्शित की गई हैं। स्वामी जी ने इसे “वैचारिक क्रांति का केंद्र” बताते हुए कहा कि यह बंदियों को आत्मचिंतन और सुधार की दिशा में प्रेरित करेगा।
संगीत गैलरी के उद्घाटन अवसर पर स्वामी जी ने कहा कि “संगीत ईश्वर की वह भाषा है, जो कठोर से कठोर हृदय को भी कोमल बना सकती है।” उन्होंने कहा कि इस पहल से बंदियों को अपनी रचनात्मक प्रतिभा निखारने का अवसर मिलेगा।
इसके बाद अतिथियों ने कारागार की पाकशाला का निरीक्षण किया और भोजन की गुणवत्ता तथा स्वच्छता की सराहना की। मंदिर परिसर में पहुंचकर शिवलिंग पर जलाभिषेक कर पूजन भी किया गया।
अतिथियों ने कारागार में संचालित विभिन्न कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रमों—जैसे एम्ब्रॉयडरी, पेंटिंग, सिलाई-कढ़ाई, कंप्यूटर, हेयर कटिंग एवं होम डेकोर—का अवलोकन किया और बंदियों से संवाद कर उनके प्रयासों की सराहना की। आर्ट गैलरी में बंदियों द्वारा बनाई गई पेंटिंग्स ने सभी को प्रभावित किया।
जेल रेडियो के माध्यम से बंदियों को संबोधित करते हुए स्वामी जी ने कहा कि मनुष्य का मन ही उसके बंधन और मोक्ष का कारण है। उन्होंने श्रीमद्भगवद्गीता के श्लोक “कर्मानुबंधिनी मनुष्यलोके” का उल्लेख करते हुए कहा कि अच्छे कर्मों से ही व्यक्ति बंधनों से मुक्ति पा सकता है।
प्रमुख सचिव अनिल गर्ग ने स्वामी जी को बंदियों द्वारा बनाई गई एक पोट्रेट भेंट करते हुए इसे सौभाग्यपूर्ण क्षण बताया। उन्होंने कहा कि स्वामी जी के आगमन से कारागार में सकारात्मक ऊर्जा का संचार हुआ है।
जेल अधीक्षक सीताराम शर्मा ने कहा कि सामान्यतः कारागार को दंडस्थल माना जाता है, लेकिन स्वामी जी की उपस्थिति ने इसे “संस्कार गृह” और “तपोस्थली” में परिवर्तित कर दिया है। उनकी वाणी ने बंदियों के हृदय में नई आशा का संचार किया है।
इस अवसर पर कारापाल के.के. दीक्षित, वरिष्ठ चिकित्सा परामर्शदाता एम.के. तोमर, चंद्रप्रकाश, उप कारापाल बृजेश नारायण पाण्डेय, अरविंद कुमार, शिवानी यादव, विजयलक्ष्मी गुप्ता, करूणेश कुमारी, मनीष मिश्रा, फार्मेसिस्ट राजेश त्रिपाठी, कमलेश सिंह, वरिष्ठ सहायक सी.एल. सिंह, कनिष्ठ सहायक हेमिल्टन सिंह सहित अनेक अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

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