नेचर कैंप थापली में SLIET पंजाब के विद्यार्थी सीखेंगे पर्यावरण संरक्षण के मूल मंत्र
तीन दिवसीय भ्रमण एवं ट्रैकिंग कार्यक्रम में प्रकृति से जुड़ने का मिलेगा अनूठा अनुभव
पंचकूला, 30 अप्रैल: युवा कल्याण कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित नेचर कैंप थापली में संत लोंगोवाल इंजीनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (SLIET)पंजाब के विद्यार्थी तीन दिवसीय शैक्षणिक भ्रमण एवं ट्रैकिंग कार्यक्रम में भाग लेंगे ,व पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के विविध आयामों को नजदीक से समझेगे। इस अवसर पर विद्यार्थियों को जंगलों, पहाड़ियों और प्राकृतिक संसाधनों के बीच रहकर पर्यावरणीय संतुलन, जैव विविधता तथा जल संरक्षण के महत्व की व्यावहारिक जानकारी प्रदान की जाएगी।
युवा वर्ग देश का भविष्य है और राष्ट्र की प्रगति में उनकी भागीदारी अत्यंत आवश्यक है। आज आवश्यकता इस बात की है कि विद्यार्थी केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित न रहें, बल्कि प्रकृति, समाज और पर्यावरण के प्रति भी अपनी जिम्मेदारियों को समझें। नेचर कैंप जैसे आयोजन विद्यार्थियों में नेतृत्व क्षमता, अनुशासन, सामूहिक कार्यशैली और संवेदनशीलता विकसित करते हैं।
युवा कल्याण संयोजक नरेंद्र सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि इस कार्यक्रम के अंतर्गत प्रतिदिन विभिन्न विश्वविद्यालयों और शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थियों को नेचर कैंप थापली भ्रमण हेतु आमंत्रित किया जाता है। हरियाणा एवं पंजाब के विभिन्न शिक्षण संस्थानों के छात्र-छात्राएं यहां आकर प्रकृति के बीच समय बिताते हैं और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े विषयों पर व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं।
उन्होंने बताया कि तीन दिवसीय इस कार्यक्रम में विद्यार्थी ट्रैकिंग गतिविधियों में भी भाग लेंगे। ट्रैकिंग के दौरान वे पहाड़ी मार्गों, वन क्षेत्र और प्राकृतिक जल स्रोतों का अवलोकन करेगें। इस दौरान उन्हें बताया गया कि किस प्रकार जंगल वर्षा चक्र को संतुलित रखते हैं, मिट्टी संरक्षण में सहायक होते हैं तथा जल स्रोतों को संरक्षित करते हैं। विद्यार्थियों ने जंगलों की जैव विविधता, औषधीय पौधों, वन्य जीवों के प्राकृतिक आवास तथा प्राकृतिक संतुलन के महत्व को समझा।
डिप्टी रेंज ऑफिसर विजय नेहरा ने विद्यार्थियों को सतत विकास एवं पारिस्थितिकीय परिवर्तन विषय पर विशेषज्ञ व्याख्यान दिया। उन्होंने जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों, बढ़ते तापमान, अनियमित वर्षा, जल संकट तथा प्रदूषण के दुष्प्रभावों पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाली पीढ़ियों को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को जल संरक्षण के व्यावहारिक उपाय बताते हुए वर्षा जल संचयन, जल का विवेकपूर्ण उपयोग तथा जल स्रोतों की स्वच्छता बनाए रखने पर बल दिया। साथ ही वृक्षारोपण, प्लास्टिक मुक्त वातावरण, जैविक कचरे के उचित प्रबंधन तथा ऊर्जा संरक्षण जैसे विषयों पर भी जागरूक किया गया। विद्यार्थियों को बताया गया कि छोटे-छोटे प्रयास, जैसे पानी बचाना, पौधे लगाना, बिजली की बचत करना और स्वच्छता बनाए रखना, पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़े परिवर्तन ला सकते हैं।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थी समूह चर्चा, प्रश्नोत्तर सत्र और प्रकृति अवलोकन गतिविधियों में उत्साहपूर्वक भाग लेंगे। विद्यार्थियों ने कहा कि यह अनुभव उनके लिए अत्यंत प्रेरणादायक रहेगा उन्होंने पहली बार प्रकृति को इतने निकट से समझा। उन्होंने कहा कि इस शिविर से उन्हें पर्यावरण संरक्षण के प्रति नई सोच और जिम्मेदारी का एहसास हुआ है।
नेचर कैंप थापली का शांत, हरित और प्राकृतिक वातावरण विद्यार्थियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। यहां की स्वच्छ वादियां, हरियाली और प्राकृतिक सौंदर्य ने सभी प्रतिभागियों को मंत्रमुग्ध कर दिया।