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मलिहाबाद में महाराजा मल्हिया पासी का गौरव द्वार पुनः स्थापित, पांच दिन के धरने के बाद प्रशासन झुका

मलिहाबाद में महाराजा मल्हिया पासी का गौरव द्वार पुनः स्थापित, पांच दिन के धरने के बाद प्रशासन झुका

इनसेप्शन डेली न्यूज़/ID News
पत्रकार संदीप शास्त्री

लखनऊ/मलिहाबाद। मलिहाबाद तहसील रोड पर महाराजा मल्हिया पासी के सम्मान में बना गौरव द्वार बृहस्पतिवार सुबह दोबारा स्थापित कर दिया गया। द्वार हटाए जाने के विरोध में पूर्व मंत्री कौशल किशोर और विधायक जयदेवी कौशल द्वारा पांच दिन तक चले लगातार धरना-प्रवास के बाद आखिरकार प्रशासन को अपना फैसला बदलना पड़ा।
गौरतलब है कि 21 और 22 अप्रैल की रात अज्ञात लोगों द्वारा इस स्मृति द्वार को चुपचाप हटा दिया गया था। यह द्वार विधायक जयदेवी की निधि से स्वीकृत 12 स्मृति द्वारों में शामिल था। अन्य द्वार यथावत रहने के बावजूद सिर्फ इसी द्वार को हटाए जाने से क्षेत्र में नाराजगी फैल गई। बाद में जानकारी सामने आई कि इसे उसी कंपनी ने हटाया था, जिसने इसका निर्माण किया था। मामले में एफआईआर भी दर्ज की गई और हटाया गया द्वार थाने के पास रखा मिला।
घटना को पासी समाज के सम्मान से जोड़ते हुए व्यापक विरोध शुरू हो गया। पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री कौशल किशोर और मलिहाबाद विधायक जयदेवी कौशल ने 25 अप्रैल की शाम मोहान तिराहे के पास धरना शुरू किया, जो लगातार पांच दिन तक चला। धरने के दौरान समाज के लोगों, स्थानीय बुजुर्गों और युवाओं ने बड़ी संख्या में भागीदारी की। लखनऊ गजेटियर के हवाले से यह भी बताया गया कि मलिहाबाद की बसावट महाराजा मल्हिया पासी से जुड़ी मानी जाती है।
आंदोलन को समर्थन देने के लिए मिश्रिख सांसद अशोक रावत, मोहनलालगंज विधायक अमरीश रावत और मोहन विधायक ब्रजेश रावत सहित कई जनप्रतिनिधि भी धरना स्थल पर पहुंचे। जनप्रतिनिधियों और विभिन्न संगठनों के समर्थन से आंदोलन का दबाव लगातार बढ़ता गया।
लगातार वार्ता और बढ़ते दबाव के बीच प्रशासन ने द्वार को पुनः स्थापित करने का आश्वासन दिया, जिसे गुरुवार सुबह पूरा कर दिया गया। द्वार की बहाली के बाद मौके पर मौजूद लोगों ने खुशी जताई और गौरव द्वार के साथ फोटो खिंचवाकर अपनी जीत का जश्न मनाया। विधायक जयदेवी कौशल ने मौके पर मिठाई भी वितरित की।
इस अवसर पर पूर्व मंत्री कौशल किशोर ने कहा कि यह सिर्फ एक ढांचा नहीं, बल्कि पासी समाज के इतिहास और स्वाभिमान का प्रतीक है। उन्होंने कहा, “सत्य परेशान हो सकता है, लेकिन पराजित नहीं होता। यह सत्य की जीत है।”
उन्होंने यह भी बताया कि क्षेत्र में विभिन्न महापुरुषों और ऐतिहासिक व्यक्तित्वों के सम्मान में कई स्मृति द्वार स्थापित किए गए हैं और आगे भी यह कार्य जारी रहेगा।
द्वार की पुनः स्थापना के बाद अब स्थानीय लोग इसकी सुरक्षा को लेकर भी प्रशासन से ठोस इंतजाम की मांग कर रहे हैं, ताकि भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो।

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