logo
Select Language
Hindi
Bengali
Tamil
Telugu
Marathi
Gujarati
Kannada
Malayalam
Punjabi
Urdu
Oriya

झारखंड में ट्रेजरी घोटाले की आशंका: 14 जिलों में जांच तेज, एसपी-डीएसपी भी दायरे में

झारखंड में सरकारी वित्तीय प्रणाली से जुड़ा एक बड़ा मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है। झारखंड के करीब 14 जिलों में कथित ट्रेजरी घोटाले की आशंका जताई गई है। इस मामले का खुलासा एजी (Accountant General) ऑफिस और राज्य के वित्त विभाग की प्रारंभिक जांच में हुआ है।

क्या है पूरा मामला?

जांच में सामने आया है कि कुछ जिलों में तैनात पुलिस अधीक्षकों (SP) ने नियमों को दरकिनार करते हुए अपने पदनाम से बैंक खाते खुलवा लिए। सरकारी खजाने (ट्रेजरी) में जाने वाले पैसे सीधे इन खातों में ट्रांसफर किए गए। इसके बाद उन्हीं खातों से चेक के माध्यम से भुगतान किया गया।

ट्रेजरी कोड के अनुसार, किसी भी बिल का भुगतान सीधे लाभार्थी के खाते में होना चाहिए। लेकिन इस नियम का उल्लंघन कर समानांतर वित्तीय व्यवस्था बनाई गई, जिससे पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।

किन जिलों में मिले सबूत?
जांच टीम को अब तक

बोकारो
सरायकेला-खरसावां
रामगढ़
पलामू
जमशेदपुर

जैसे जिलों में गड़बड़ी के ठोस संकेत मिले हैं।

जमशेदपुर में वित्त वर्ष 2016-17 के दौरान एसपी के खाते में करीब 38 लाख रुपए आने का मामला सामने आया है, जिससे बाद में सिपाहियों को चेक के जरिए भुगतान किया गया।

जांच की स्थिति

एजी ऑफिस और वित्त विभाग के अधिकारी इस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रहे हैं। आशंका जताई जा रही है कि 14 जिलों में इसी तरह की अनियमितताएं हुई हैं। जांच का दायरा बढ़ाते हुए एसपी और डीएसपी स्तर के अधिकारियों की भूमिका भी खंगाली जा रही है।

क्या हो सकते हैं परिणाम?

यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित अधिकारियों पर विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है। यह मामला सरकारी वित्तीय अनुशासन और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

जनता की राय

यह मामला सिर्फ एक वित्तीय गड़बड़ी नहीं, बल्कि सिस्टम की जवाबदेही और पारदर्शिता से जुड़ा मुद्दा है।
क्या ऐसे मामलों में सख्त सजा होनी चाहिए?
क्या ट्रेजरी सिस्टम में सुधार की जरूरत है?
आप अपनी राय जरूर साझा करें।

1
12 views

Comment