सरायकेला में इंसानियत शर्मसार: बेटे ने घर से निकाला, बुजुर्ग धूप में भीख मांगने को मजबूर
सरायकेला के सीनी बाजार से मानवता को झकझोर देने वाली एक मार्मिक तस्वीर सामने आई है। जहां एक 75 वर्षीय बुजुर्ग, टोसे हांसदा, कड़ी धूप में सड़क किनारे बैठकर भीख मांगने को मजबूर हैं। यह घटना न सिर्फ पारिवारिक मूल्यों पर सवाल उठाती है, बल्कि समाज की संवेदनशीलता को भी चुनौती देती है।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार, टोसे हांसदा सरायकेला प्रखंड के मोहितपुर पंचायत स्थित महादेवपुर टोला भद्रोडीह के निवासी हैं। उनकी पत्नी का कई वर्ष पहले निधन हो चुका है। परिवार में उनका इकलौता बेटा और बहू हैं, लेकिन आरोप है कि दोनों ने उन्हें खाना देना बंद कर दिया और मारपीट कर घर से बाहर निकाल दिया।
बुजुर्ग का कहना है कि पिछले एक सप्ताह से वे सीनी बाजार में भीख मांगकर अपना गुजारा कर रहे हैं। भीषण गर्मी में बिना छांव और पानी के वे दिन गुजारने को मजबूर हैं, जो बेहद चिंताजनक स्थिति है।
लोगों की प्रतिक्रिया
स्थानीय राहगीर संजय महतो ने कहा,
"हर दिन बाबा को यहां बैठा देखते हैं। बहुत दुख होता है। जिस उम्र में आराम करना चाहिए, उस उम्र में उन्हें भीख मांगनी पड़ रही है। बेटे को शर्म आनी चाहिए।"
सामाजिक और प्रशासनिक सवाल
यह घटना कई गंभीर सवाल खड़े करती है—
क्या आज के समाज में बुजुर्ग सुरक्षित हैं?
पारिवारिक जिम्मेदारियां क्यों खत्म होती जा रही हैं?
क्या प्रशासन को ऐसे मामलों में स्वतः संज्ञान नहीं लेना चाहिए?
भारत में वरिष्ठ नागरिक संरक्षण अधिनियम 2007 के तहत बच्चों का यह कर्तव्य है कि वे अपने माता-पिता की देखभाल करें। ऐसे में यह मामला कानूनन भी गंभीर हो सकता है।
जरूरत क्या है?
प्रशासन को तत्काल बुजुर्ग की मदद करनी चाहिए
समाज को आगे आकर सहयोग करना चाहिए
परिवार के खिलाफ उचित कार्रवाई होनी चाहिए
निष्कर्ष
यह सिर्फ एक व्यक्ति की कहानी नहीं, बल्कि बदलते समाज का आईना है। जहां रिश्ते कमजोर हो रहे हैं और संवेदनाएं खत्म होती दिख रही हैं।
आपकी क्या राय है? क्या ऐसे मामलों में सरकार और समाज को सख्त कदम उठाने चाहिए?