महाराष्ट्र में रहना है तो मराठी बोलना ही होगा! मंत्री प्रताप सरनाईक का कड़ा अल्टीमेटम; 562 रिक्षा चालकों पर गिरी गाज
मुंबई: महाराष्ट्र में व्यवसाय करने वालों के लिए अब मराठी भाषा का ज्ञान अनिवार्य होने जा रहा है। राज्य के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने दोटूक शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा है कि, "अगर आपको बुनियादी मराठी समझ नहीं आती, तो आपको महाराष्ट्र में व्यापार करने का कोई अधिकार नहीं है।"
इस कड़ी कार्रवाई की शुरुआत करते हुए मीरा-भाईंदर के 562 रिक्शा चालकों को नोटिस जारी करने की घोषणा की गई है।
🚨 100 दिनों का 'अल्टीमेटम' जारी
परिवहन मंत्री ने साफ कर दिया है कि मराठी अनिवार्य करने का निर्णय वापस नहीं लिया जाएगा। हालांकि, सरकार ने इसे सीखने के लिए 15 अगस्त तक का समय दिया है।
मुहिम की अवधि: 1 मई से 15 अगस्त (100 दिन)।
लक्ष्य: इस दौरान सभी ऑटो और टैक्सी चालकों को कम से कम इतनी मराठी सीखनी होगी कि वे यात्रियों से संवाद कर सकें।
कार्यवाही: फिलहाल सीधे कार्रवाई नहीं होगी, लेकिन 100 दिन बाद भी जो सुधार नहीं दिखाएगा, उसके खिलाफ परिवहन नियमों के तहत सख्त एक्शन लिया जाएगा।
💥 "हमें PHD नहीं, बस बातचीत वाली मराठी चाहिए"
पत्रकार वार्ता में सरनाईक ने विरोधियों को करारा जवाब देते हुए कहा:
"हम यह नहीं कह रहे कि आप मराठी में PHD या M.A. करें। लेकिन जब एक यात्री आपसे बात करता है, तो आपको वह समझ आना चाहिए। अगर आप इतना भी नहीं कर सकते, तो आप यहां धंधा नहीं कर पाएंगे। कोई कितना भी दबाव डाले या आंदोलन की धमकी दे, कानून का पालन तो करना ही होगा।"
📍 मुख्य बिंदु: क्या बदलेगा?
नियमों का पालन: परिवहन विभाग के 20 नियमों का उल्लंघन करने वालों पर अब पैनी नजर रहेगी।
सीखने का मौका: सरकार ने कहा है कि जो मराठी सीखना चाहते हैं, उन्हें सिखाया जाएगा।
लाइसेंस पर खतरा: 15 अगस्त के बाद अगर चालक बुनियादी मराठी बोलने में विफल रहते हैं, तो उनके परमिट और लाइसेंस पर वैधानिक कार्रवाई हो सकती है।