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विश्व नृत्य दिवस पर शास्त्रीय नृत्य संरक्षण का आह्वान।

कोटा। विश्व नृत्य दिवस के अवसर पर संगीत एवं नृत्य प्रेमियों को शुभकामनाएं देते हुए साधना संगीत संस्थान ने भारतीय शास्त्रीय नृत्य विधाओं के संरक्षण और संवर्धन पर विशेष बल दिया है। संस्थान की ओर से जारी संदेश में कहा गया कि गुरु-शिष्य परंपरा के माध्यम से नृत्य गुरुओं द्वारा अपने शिष्यों के साथ प्रस्तुत किए जा रहे कार्यक्रम भारतीय संस्कृति की जीवंत धरोहर हैं, जो गौरव और संतोष का विषय हैं।

संदेश में चिंता व्यक्त की गई कि वर्तमान समय में सांस्कृतिक प्रदूषण के कारण शास्त्रीय नृत्य विधाएं धीरे-धीरे हाशिए पर जा रही हैं। ऐसे परिदृश्य में नृत्य शिक्षकों की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है कि वे बच्चों में शास्त्रीय नृत्य के प्रति रुचि विकसित करें तथा अभिभावकों को इसकी महत्ता से अवगत कराएं।

यह भी उल्लेख किया गया कि करियर निर्माण के लिए सीमित विकल्पों तक ही स्वयं को सीमित रखना उचित नहीं है, बल्कि शास्त्रीय नृत्य को भी एक सशक्त करियर विकल्प के रूप में अपनाया जा सकता है। अभिभावकों से आह्वान किया गया कि वे केवल परंपरागत सोच का अनुसरण न करते हुए बच्चों की रुचि और प्रतिभा को पहचानें।

भारत की सांस्कृतिक समृद्धि का उल्लेख करते हुए कहा गया कि यह भूमि प्रतिभाओं से परिपूर्ण है, आवश्यकता केवल उन्हें पहचानने और सही दिशा देने की है। शिक्षकों से अपेक्षा जताई गई कि वे प्रतिभाशाली बच्चों को तराशकर उन्हें उत्कृष्ट कलाकार के रूप में स्थापित करें।

शास्त्रीय नृत्य की विविधता पर प्रकाश डालते हुए कत्थक नृत्य की विशिष्टताओं का भी वर्णन किया गया। जयपुर घराने की तेज़ चक्कर, सशक्त पदाघात, लड़ी और बोलबांट की विशेषता तथा लखनऊ घराने की नज़ाकत और भाव-प्रदर्शन की बारीकियों को भारतीय नृत्य परंपरा की अनूठी पहचान बताया गया।

अंत में सभी से आह्वान किया गया कि वे मिलकर शास्त्रीय नृत्य विधाओं को आगे बढ़ाएं और कला की देवी मां सरस्वती की उपासना में स्वयं को समर्पित करें।

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