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केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि वह मंदिरों पर सरकारी नियंत्रण के पक्ष में नहीं है। भारत में कई राज्यों में हिंदू धर्म के ऐसे ऐसे बड़े

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि वह मंदिरों पर सरकारी नियंत्रण के पक्ष में नहीं है। भारत में कई राज्यों में हिंदू धर्म के ऐसे ऐसे बड़े मंदिर हैं, जिनमें रोज लाखों-करोंड़ों का चढ़ावा चढ़ता है। लेकिन वहां की राज्य सरकारें मंदिरों के प्रशासन, आय और संपत्ति का प्रबंधन अपने हाथ में रखती है। इस परंपरा के समर्थक इसे पारदर्शिता और बेहतर प्रबंधन के लिए जरूरी मानते हैं, तो विरोधी इसे धार्मिक स्वतंत्रता में हस्तक्षेप बताते हैं।

चीफ जस्टिस सूर्यकांत के नेतृत्व वाली 9 जजों की पीठ, संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 के तहत राज्य के अधिकारों के दायरे की समीक्षा कर रही है, जो सबरीमाला मंदिर पर पुनर्विचार याचिकाओं से निकला हुआ मामला है। इसके बाद मंदिरों के प्रशासन और उन पर सरकारी नियंत्रण को लेकर लंबे समय से चल रही बहस ने एक बार फिर जोर पकड़ लिया है। इस लीगल विश्लेषण में जानेंगे कि कब से और कैसे शुरु हुई ये परंपरा और क्या मंदिरों पर सरकारी नियंत्रण वाकई जनहित में है, या फिर यह परंपराओं और आस्था के अधिकारों को प्रभावित कर रहा है।

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