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*होम डिलीवरी के नाम पर छलावा , उपभोक्ता खुद बने डिलीवरी बॉय* *सुविधा के नाम पर शोषण? सहगौली के एच पी गैस एजेंसी पर गंभीर आरोप* सुल्तानपुर के कुड़वार

*होम डिलीवरी के नाम पर छलावा , उपभोक्ता खुद बने डिलीवरी बॉय*

*सुविधा के नाम पर शोषण? सहगौली के एच पी गैस एजेंसी पर गंभीर आरोप*

सुल्तानपुर के कुड़वार साहगौली में एचपी गैस एजेंसी का हाल कुछ ऐसा है मानो उपभोक्ता नहीं, धैर्य की परीक्षा देने आए प्रतियोगी हों। भीषण गर्मी में गैस बुक कराना तो आसान है लेकिन सिलेंडर पाना किसी तीर्थ यात्रा से कम नहीं। एजेंसी के कर्मचारी चंद्रिका शुक्ल उपभोक्ताओं से ओटीपी तो ऐसे ले लेते हैं जैसे अभी गैस घर तक पहुंच जाएगी लेकिन हकीकत में उन्हें 10 किलोमीटर दूर गोदाम का दर्शन करने भेज दिया जाता है वो भी तीन दिन बाद आइए के पावन संदेश के साथ।
कमाल की व्यवस्था है होम डिलीवरी का पैसा पहले जमा करवा लो फिर उपभोक्ता को खुद ही डिलीवरी बॉय बना दो। अगर यह सेवा मॉडल है तो फिर अगला कदम शायद यही होगा कि ग्राहक खुद ही सिलेंडर भरकर लाए।
जब एजेंसी संचालक प्रियंका राणा से जवाब मांगने की कोशिश की गई तो फोन ने भी शायद सच्चाई से दूरी बना ली रिसीव ही नहीं हुआ। उधर पूर्ति निरीक्षक मयंक चतुर्वेदी को इस व्यवस्था की कोई जानकारी नहीं है क्योंकि वे मंत्री जी की मीटिंग में व्यस्त हैं और पूर्ति अधिकारी का फोन? वह तो जैसे परंपरा निभा रहा है आठ बार मिलाओ, फिर भी न उठे।
ऐसा लगता है कि यहां उपभोक्ताओं की समस्या से ज्यादा महत्वपूर्ण है जिम्मेदारों की व्यस्तता और एजेंसी की मनमानी। सवाल सीधा है जब उपभोक्ता पैसे देकर भी सेवा के लिए दर-दर भटक रहा है तो यह लापरवाही है या खुला शोषण। अगर यही हाल रहा तो आने वाले समय में गैस सिलेंडर नहीं, बल्कि सिस्टम ही फटने वाला है।

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