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रिक्शा-टैक्सी चालकों के लिए मराठी अनिवार्य; सरकार के फैसले के खिलाफ संगठन आक्रामक

मुंबई: राज्य के रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए 'व्यावहारिक मराठी' अनिवार्य करने के राज्य सरकार के फैसले से नया विवाद खड़ा हो गया है। परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने 1 मई से इस नियम को लागू करने और मराठी न जानने वालों के लाइसेंस रद्द करने की भूमिका ली है। इस निर्णय को अन्यायपूर्ण बताते हुए रिक्शा-टैक्सी चालक संगठनों ने कड़ा विरोध जताया है और मुंबई में 'एल्गार' (आंदोलन) का बिगुल फूंक दिया है।
​आज, 27 अप्रैल को गोरेगांव स्थित केशव गोरे स्मारक ट्रस्ट हॉल में श्रमिक नेता शशांक राव के नेतृत्व में चालकों की एक बड़ी सभा आयोजित की जाएगी। दूसरी ओर, इस विवाद का समाधान निकालने के लिए मंत्रालय में दोपहर 12:30 बजे मंत्री प्रताप सरनाईक ने एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है। इस बैठक में शशांक राव और संजय निरुपम समेत विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित रहेंगे।
​सरकार का मानना है कि यात्रियों के साथ बेहतर संवाद और सेवा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए चालकों को मराठी आना आवश्यक है। हालांकि, लाइसेंस रद्द करने की चेतावनी से चालकों में भारी रोष है। आज की बैठक में सरकार भाषा प्रशिक्षण को लेकर क्या रुख अपनाती है, इस पर सभी की निगाहें टिकी हैं। इस बीच, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस निर्णय से मराठी भाषा का सम्मान बढ़ेगा या कोई नया राजनीतिक संघर्ष खड़ा होगा।

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