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स्वच्छता सर्वे; अगले माह आएगी टीम, पिछले साल 22वें नंबर पर था झालावाड़

भास्कर न्यूज | झालावाड़ स्वच्छता सर्वे के लिए केंद्र सरकार की टीम मई माह के पहले सप्ताह में आ सकती है, इससे पहले शहर की सफाई को लेकर नगरपरिषद की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। हकीकत में शहर के कई इलाकों के हालात बेहतर खराब हैं। भास्कर की पड़ताल में चौंकाने वाला सच सामने आया है कि नगरपरिषद के 10 से ज्यादा सफाईकर्मी अपने मूल कार्य के बजाय सरकारी दफ्तर में ड्यूटी कर रहे हैं। गीला और सूखा कचरा अलग अलग करने की यहां कोई व्यवस्था नहीं है। इसी का नतीजा है कि स्वच्छता रैंकिंग में गीला और सूखा कचरा वाले पार्ट में माइनस मार्किंग होगी।
इधर, गागरोन रोड स्थित कचरा संग्रहण केंद्र में भी प्रॉपर तरीके से कचरे के निस्तारण की कोई व्यवस्था नहीं हो पाई है। यहां भी टनों कचरा बिखरा पड़ा है जो सड़ांध मार रहा है। एक माह के अंदर यहां पर एक स्वतंत्र एजेंसी की टीम आएगी और 5-7 दिन शहर की सफाई व्यवस्था की जांच करेगी। 12500 अंकों में से बेहतर परिणाम लाना इस बार भी आसान नहीं होगा। वहीं डोर-टू-डोर वेस्ट कलेक्शन और गीला-सूखा कचरा अलग-अलग संग्रहित नहीं हो पा रहा है। हालांकि नगरपरिषद की ओर से वेस्ट टू बेस्ट के लिए शुरू किए गए प्रयासों से कुछ उम्मीदें हैं।
अनुराग भार्गव, प्रशासक डीएलबी की ओर से इनको प्रशासक की जिम्मेदारी दी गई तब से वे सिर्फ एक बार ही नगरपरिषद पहुंचे, पहले ही निरीक्षण में उन्हें अनियमितताएं मिलीं, लेकिन उसके बाद भी व्यवस्था में कोई सुधार नहीं हो पाया है। अशोक शर्मा, आयुक्त व्यवस्था सुधारने और कर्मचारियों की तैनाती उनके आदेश से होती है, लेकिन झालावाड़ नगरपरिषद में वह बैठते ही नहीं हैं। यानी, जब से उनकी यहां नियुक्ति हुई है तब से ही आयुक्त की सीट खाली पड़ी है।
वे अधिकतर समय झालरापाटन नगरपालिका में बिता रहे हैं, जबकि उन्हें यहां का अतिरिक्त कार्यभार दिया गया है। सौरभ गुप्ता, सफाई प्रभारी गुप्ता यूं तो एईएन हैं, लेकिन इनको सफाई शाखा का प्रभारी बना रखा है। यहां कचरा संग्रहण केंद्र की व्यवस्था बनाए रखना भी इनकी जिम्मेदारी है, लेकिन वहां पर टनों से कचरा बिखरा हुआ सड़ांध मार रहा है। ^शहर में मई के आखिरी सप्ताह में स्वच्छता सर्वेक्षण की टीम आएगी। इसके लिए अभी तैयारियां की जा रही हैं। गाइडलाइन के अनुरूप हम विशेष फोकस कर रहे हैं।

- सौरभ गुप्ता, प्रभारी
स्वच्छता केंद्र की स्वतंत्र एजेंसी केवल मुख्य सड़कों तक सीमित नहीं रहेगी। सर्वे के दौरान फील्ड विजिट में आवासीय और व्यावसायिक क्षेत्रों के साथ कच्ची बस्तियों, स्कूलों, सार्वजनिक शौचालयों और स्थलों की सफाई भी जांची जाएगी। पर्यटन और धार्मिक स्थलों पर भी स्वच्छता के इंतजाम देख जाएंगे। नालों, जल स्रोतों, कचरा प्रबंधन इकाइयों और लैंड फिल साइट्स की सफाई की समीक्षा की जाएगी। मौके पर फोटो और वीडियो रिकॉर्डिंग कर साक्ष्य भी जुटाए जाएंगे। शहर में कुल 45 वार्ड में 200 से अधिक सफाई कर्मी तैनात है।
झालावाड़| स्वच्छता रैंकिंग को लेकर देशभर में स्वच्छता सर्वेक्षण शुरू हो चुका है। झालावाड़ जिले में अगले माह आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय की टीम आएगी। टीम 5 से 7 दिन यहां रहेगी और सफाई व्यवस्था की जांच करेगी। इस बार 12 हजार 500 अंकों की स्वच्छता परीक्षा होगी। पिछले साल प्रदेश में झालावाड़ नगरपरिषद 22वें पायदान पर थी। हालात देखकर इस बार भी पिछड़ना तय है, क्योंकि स्वच्छता रैंकिंग में सुधार करना आसान नहीं होगा। डंपिंग स्टेशन से लेकर शहर में जगह-जगह लगे गंदगी के ढेर और गलियों में यहां-वहां फैला कचरा शहरवासियों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है। इन कमियों से कट सकते हैं नंबर

{ गीला- सूखा कचरा अलग अलग नहीं उठाया जा रहा है।

{ जहां मर्जी वहां लोग कचरा डाल रहे हैं। कई एरिया की तो साफ सफाई ही नहीं हो पा रही है।

{ शहर का दायरा काफी बढ़ चुका है, लेकिन कई क्षेत्रों में अभी भी घर घर कचरा संग्रहण नहीं हो पा रहा है।

1. घरों से कपड़े, जूते, रद्दी, प्लास्टिक आईटम सभी घर घर कचरा संग्रहण में एकत्रित हो रहे हैं। इसने अधिकतर एरिया कवर किया हुआ है।
2. घर घर शौचालय की स्थिति यहां बेहतर है। लक्ष्य का शत प्रतिशत घरों में शौचालय का निर्माण हो चुका है।

3. फाइलों का डॉक्यूमेंटेशन भी पूरा है।

Aima media jhalawar




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