नई सरकार का पहला फेरबदल —
इनाम किसे, दंड किसे?
सम्राट सरकार का पहला IAS तबादला आदेश:
विजय कुमार | वरिष्ठ पत्रकार
बिहार में नई सरकार आते ही प्रशासनिक शतरंज की बिसात बिछती है।
मोहरे बदलते हैं,
पर खेल वही पुराना रहता है —
जो 'हमारा' है उसे इनाम,
जो 'नहीं' है उसे 'साइड पोस्टिंग'।
26 अप्रैल 2026 —
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के शपथ ग्रहण के मात्र 11 दिन बाद —
बिहार सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग ने एक अधिसूचना जारी की।
संख्या–सा.प्र.–7292 से 7295 तक,
दिनांक 26.04.2026।
चार वरिष्ठ IAS अधिकारियों का स्थानांतरण।
ऊपर से देखने पर यह 'सामान्य प्रशासनिक फेरबदल' लगता है।
लेकिन जब इन तबादलों को गहराई से पढ़ा जाए —
तो हर आदेश के पीछे एक संदेश छुपा नजर आता है।
आदेश का पूर्ण विश्लेषण —
अधिसूचना सा.प्र.–7292/7295, दि. 26.04.2026
अधिकारी (बैच)
पहले कहाँ थे
अब कहाँ भेजे गए
रॉबर्ट एल. चोंथू(IAS 1997)
प्रधान सचिव,राज्यपाल सचिवालय
प्रधान सचिव,अल्पसंख्यक कल्याण विभाग,
गोपाल मीणा(IAS 2007)
सचिव, राजस्व एवंभूमि सुधार विभाग
सचिव,राज्यपाल सचिवालय ,
मो. सोहैल(IAS 2007)
सचिव,अल्पसंख्यक कल्याण
सचिव,सामान्य प्रशासन विभाग,
शैलेन्द्र कुमार(IAS 2013)
विशेष सचिव,कृषि विभाग
DM + जिला दंडाधिकारी,लखीसराय,
रॉबर्ट एल. चोंथू —
'साइड पोस्टिंग' या राजनीतिक संदेश?
श्री रॉबर्ट एल. चोंथू —
IAS 1997 बैच —
बिहार के सबसे वरिष्ठ IAS अधिकारियों में से एक।
वे राज्यपाल सचिवालय के प्रधान सचिव जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण पद पर थे।
अब उन्हें स्थानांतरित कर 'अल्पसंख्यक कल्याण विभाग' का प्रधान सचिव बनाया गया है।
प्रश्न यह है —
क्या यह प्रशासनिक आवश्यकता थी या नई सरकार का पहला संदेश?
राज्यपाल सचिवालय एक संवैधानिक पद है —
वहाँ से किसी वरिष्ठ अधिकारी को हटाना कोई सामान्य घटना नहीं।
और अल्पसंख्यक कल्याण विभाग —
जो बजट और राजनीतिक प्राथमिकता दोनों दृष्टि से एक 'कम प्रभावशाली' विभाग है —
क्या यह सम्राट सरकार की पहली 'दंड-पोस्टिंग' है?
"1997 बैच का वरिष्ठतम अधिकारी राज्यपाल सचिवालय से अल्पसंख्यक कल्याण में — यह प्रशासनिक जरूरत है या नई सरकार का पहला संदेश? "
गोपाल मीणा — GoI में पैनलबद्ध,
फिर भी राज्यपाल सचिवालय क्यों?
श्री गोपाल मीणा — IAS 2007 बैच — हाल ही में भारत सरकार में संयुक्त सचिव स्तर के पद के लिए पैनलबद्ध (empanelled) हुए हैं।
यह एक बड़ी उपलब्धि है।
जून 2025 में उन्हें सारण प्रमंडल के आयुक्त पद से राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग का सचिव बनाया गया था।
लेकिन अब — 10 महीने के भीतर — उन्हें 'राज्यपाल सचिवालय का सचिव' बना दिया गया।
GoI empanelment के बाद राज्यपाल सचिवालय — क्या यह 'प्रतीक्षा कक्ष' है या 'पुरस्कार पोस्टिंग'?
बिहार के प्रशासनिक गलियारों में इस तबादले की खूब चर्चा है।
मो. सोहैल —
अल्पसंख्यक से GAD: क्या यह 'इनाम' है?
श्री मो. सोहैल — IAS 2007 बैच — अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के सचिव से सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) के सचिव बने।
GAD बिहार प्रशासन का 'केंद्रीय विभाग' है —
यहाँ से सभी IAS तबादले, नियुक्तियाँ और प्रशासनिक आदेश होते हैं।
यह एक महत्वपूर्ण और प्रभावशाली पद है।
मो. सोहैल के इस तबादले को 'अपग्रेड' माना जा रहा है।
लेकिन एक बात ध्यान देने की है —
क्या इस तबादले के पीछे कोई राजनीतिक समीकरण है?
नई सरकार के शुरुआती दिनों में GAD सचिव की भूमिका बेहद अहम होती है —
क्योंकि आगे के सभी तबादले और नियुक्तियाँ इसी विभाग से होती हैं।
शैलेन्द्र कुमार — कृषि विशेष सचिव से DM लखीसराय:
पुरस्कार या दंड?
श्री शैलेन्द्र कुमार — IAS 2013 बैच — कृषि विभाग के विशेष सचिव से सीधे लखीसराय के जिला दंडाधिकारी (DM) बनाए गए।
साथ ही उन्हें भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS) की धारा-14 के तहत जिला दंडाधिकारी का अतिरिक्त दायित्व भी दिया गया।
DM पोस्टिंग —
विशेषकर छोटे जिलों में —
कभी-कभी 'फील्ड पनिशमेंट' के रूप में देखा जाता है।
लेकिन दूसरी तरफ, कुछ युवा IAS अधिकारियों के लिए DM पद जमीनी अनुभव और चुनौती का अवसर भी होता है।
2013 बैच के लिए DM पद स्वाभाविक है —
लेकिन कृषि विभाग जैसे नीतिगत पद से सीधे जिले में भेजने के संदर्भ में प्रश्न तो उठेगा ही।
तबादलों का राजनीतिक पाठ —
'इनाम और दंड' की सूची,
संभावित 'इनाम' पोस्टिंग,
संभावित 'साइड/दंड' पोस्टिंग,
मो. सोहैल → GAD सचिव(सबसे प्रभावशाली विभाग)
रॉबर्ट एल. चोंथू → अल्पसंख्यक कल्याण(राज्यपाल सचिवालय से हटाए गए)
गोपाल मीणा → राज्यपाल सचिवालय(संवैधानिक प्रतिष्ठा)
शैलेन्द्र कुमार → DM लखीसराय(नीति से जिले की ओर)
वे प्रश्न जो बिहार का नागरिक सरकार से पूछे:
शपथ के 11 दिन में तबादला —
क्या यह प्रशासनिक जरूरत थी या राजनीतिक सफाई?
रॉबर्ट एल. चोंथू को राज्यपाल सचिवालय से हटाने का कारण क्या था —
नई सरकार इसे सार्वजनिक करे।
GoI में empanelled गोपाल मीणा को राजस्व विभाग जैसे महत्वपूर्ण पद से हटाकर राज्यपाल सचिवालय क्यों —
क्या यह केंद्र-राज्य तालमेल का हिस्सा है?
GAD सचिव जैसे संवेदनशील पद पर नियुक्ति के लिए क्या मापदंड थे —
योग्यता या निष्ठा?
बिहार में IAS तबादले अब भी राजनीतिक 'इनाम-दंड' प्रणाली पर चलते हैं — सम्राट सरकार इसे बदलने का कोई ठोस आश्वासन दे।
निष्कर्ष —
फाइल बदली,
तस्वीर नहीं,
बिहार में हर सरकार का पहला काम होता है — 'अपने' अफसरों को महत्वपूर्ण पदों पर बैठाना और 'उन्हें' हटाना जो पिछली सरकार के करीब थे।
यह परंपरा दशकों पुरानी है।
सम्राट चौधरी की सरकार ने भी शपथ के 11 दिन के भीतर यह परंपरा निभा दी।
लेकिन बिहार की जनता को इससे क्या मिलता है?
क्या IAS तबादलों की यह शतरंज किसी किसान के खेत तक पानी पहुँचाती है?
क्या किसी गरीब के मुकदमे का निपटारा जल्दी होता है?
क्या भ्रष्ट अफसर जेल जाते हैं? जब तक इन सवालों का जवाब 'हाँ' में नहीं होगा — तबादलों की यह सूची सिर्फ कागज का एक टुकड़ा है।
"बिहार में IAS तबादला एक संदेश होता है —
पर यह संदेश जनता के लिए नहीं,
अफसरशाही के लिए होता हैं!