Punjab News: पंजाब में बिजली कटौती पर लगी रोक, अब नहीं जाएगी बिजली, CM का बड़ा फैसला
पंजाब में इन दिनों बिजली संकट लगातार गहराता जा रहा है। बिजली विभाग ने सख्त कदम उठाते हुए 30 अप्रैल तक 11 केवी और उससे ऊपर के किसी भी काम (पीटीडब्ल्यू) पर रोक लगा दी है। अब बिना जोनल ऑफिस की लिखित अनुमति के कोई भी कार्य नहीं किया जाएगा।
Punjab News: पंजाब में इन दिनों बिजली संकट लगातार गहराता जा रहा है। भीषण गर्मी, बढ़ती बिजली मांग, तकनीकी खामियों और कर्मचारियों की सीमित कार्यशैली के कारण हालात नियंत्रण से बाहर होते नजर आ रहे हैं। इसी स्थिति को देखते हुए बिजली विभाग ने सख्त कदम उठाते हुए 30 अप्रैल तक 11 केवी और उससे ऊपर के किसी भी काम (पीटीडब्ल्यू) पर रोक लगा दी है। अब बिना जोनल ऑफिस की लिखित अनुमति के कोई भी कार्य नहीं किया जाएगा।
विभाग द्वारा जारी आदेशों में स्पष्ट कहा गया है कि पहले से निर्धारित सभी शटडाउन तुरंत प्रभाव से रद्द कर दिए गए हैं। साथ ही फील्ड अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे जहां भी काम चल रहा है, उसे तुरंत बंद करें और बिजली आपूर्ति को जल्द से जल्द बहाल करें। विभाग ने इन निर्देशों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सख्ती से पालन करने को कहा है।
लोगों में भारी रोष
हालांकि, इन आदेशों के बावजूद राज्य के कई हिस्सों में बिजली कटौती जारी है, जिससे लोगों में भारी रोष देखने को मिल रहा है। मानसा और बुढलाडा में दोपहर के समय लोगों ने बिजली विभाग के दफ्तरों का घेराव किया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि रात के समय बार-बार बिजली कट लगते हैं, जिससे उन्हें सोने तक में परेशानी होती है। गर्मी के इस मौसम में लगातार बिजली कटौती ने लोगों की दिनचर्या पूरी तरह प्रभावित कर दी है।
इसी तरह बठिंडा के कोटसमीर और तुंगवाली गांवों में ग्रामीणों ने बिजली ग्रिड पर पहुंचकर विरोध प्रदर्शन किया। ग्रामीणों का आरोप है कि शाम 6 बजे से लेकर रात 12 बजे तक नियमित रूप से बिजली काटी जाती है, जिससे उन्हें भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। खेतों की सिंचाई, घरेलू कामकाज और बच्चों की पढ़ाई तक प्रभावित हो रही है।
राज्य में तेजी से बढ़ रही बिजली की मांग है। शुक्रवार को पंजाब में बिजली की मांग 12,130 मेगावाट तक पहुंच गई। इस मांग को पूरा करने के लिए राज्य को केंद्रीय पूल से लगभग 7,000 मेगावाट बिजली खरीदनी पड़ी, जबकि राज्य के अपने उत्पादन से करीब 5,100 मेगावाट बिजली ही उपलब्ध हो सकी। इसके बावजूद कुल मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन नहीं बन पाया, जिसके चलते कटौती करनी पड़ी।
कटौती को रोकने की कोशिश की
इस संकट को और गंभीर बना रही है बिजली विभाग के तकनीकी स्टाफ की कार्यशैली। वर्तमान में तकनीकी कर्मचारी केवल वही काम कर रहे हैं जो उनके प्रोफाइल में निर्धारित है। वे अतिरिक्त जिम्मेदारियां नहीं निभा रहे हैं, जिसके कारण जब कोई फीडर ट्रिप होता है, तो उसे ठीक करने में काफी समय लग जाता है। इसके अलावा कर्मचारी केवल 8 घंटे की ड्यूटी कर रहे हैं और उनकी हड़ताल 25 मई तक जारी रहने वाली है। इससे बिजली आपूर्ति व्यवस्था पर और दबाव बढ़ गया है।