राजधानी भोपाल की IES यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाली एक छात्रा को क्या पता था कि जिससे वह दोस्ती कर रही है, वह उसके धर्म और भविष्य को निगलने का षड्यंत्र
राजधानी भोपाल की IES यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाली एक छात्रा को क्या पता था कि जिससे वह दोस्ती कर रही है, वह उसके धर्म और भविष्य को निगलने का षड्यंत्र रच रहा है। आरोपी आसिफ अली ने खुद को 'आशीष पांडे' बताकर छात्रा से मेल-जोल बढ़ाया। नाम बदला, पहचान छिपाई और फिर शुरू हुआ शोषण का वह सिलसिला जो करीब एक साल तक चला।
इस धोखे की पराकाष्ठा तब हुई जब पीड़िता गर्भवती हो गई। जब उसने अपने अधिकार और शादी की बात की, तब उस 'आशीष' का असली चेहरा सामने आया। वह कोई आशीष नहीं, बल्कि आसिफ अली था। पहचान उजागर होते ही पीड़िता के पैरों तले जमीन खिसक गई, लेकिन साहस जुटाकर वह न्याय की आस में महिला थाने पहुँची।
एफआईआर दर्ज हुई, लेकिन सवाल यह है कि आरोपी आसिफ अली अब तक आजाद क्यों है? पीड़िता का आरोप इससे भी ज्यादा चौंकाने वाला है। पीड़िता ने सीधे तौर पर महिला थाना प्रभारी पर आरोप लगाया है कि उन पर दबाव डाला गया और पैसों का लालच देकर मामला रफा-दफा करने की बात कही गई..जो यह साफ दर्शाता है कि अपराधियों के हौसले बुलंद हैं और रक्षक ही भक्षक की भूमिका में नजर आ रहे हैं। यह सिर्फ एक आपराधिक मामला नहीं बल्कि राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था पर एक बड़ा तमाचा है, जहाँ पहचान बदलकर बेटियों की अस्मत लूटने वाले शिकारी अब भी आजाद घूम रहे हैं और प्रशासन चुप्पी साधे बैठा है....
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