उत्तराखंड जनगणना में मकान गढ़ना ड्यूटी शुरू, शिक्षक अन्य आवश्यक कार्यों से मुक्त नहीं होंगे
गढ़वाल: उत्तराखंड में आगामी जनगणना की तैयारियां तेज हो गई हैं और इसके तहत शिक्षकों एवं शासकीय कर्मचारियों की ड्यूटी लगनी शुरू हो गई है। शासन द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, इस बार शिक्षकों को जनगणना कार्य के साथ-साथ उनके अन्य आवश्यक शैक्षिक एवं प्रशासनिक दायित्वों से मुक्त नहीं किया जाएगा।
शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि विद्यालयों में पढ़ाई की निरंतरता बनाए रखना प्राथमिकता है, इसलिए शिक्षकों को दोनों जिम्मेदारियों का संतुलन बनाकर कार्य करना होगा। इसके लिए समय-समय पर आवश्यक दिशा-निर्देश भी जारी किए जा रहे हैं। इसमें यह भी उल्लेख है एक कर्मचारी को १८० घरों की गढ़ना ३० दिनों में पूरी करनी है। अगर वे २० दिन में प्रत्येक दिन ९ घरों में भी जाते हैं। तो कार्य पूर्ण हो जाएगा । विभागीय अधिकारियों। का यह भी कहना है ये एक पार्ट टाइम ड्यूटी है, जिसके लिए शिक्षकों और शासकीय कर्मचारियों को मानदेय अलग से दिया जा रहा है।
हालांकि, शिक्षकों के बीच इस निर्णय को लेकर मिश्रित प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कुछ शिक्षकों का कहना है कि जनगणना जैसे महत्वपूर्ण कार्य के साथ नियमित शैक्षिक जिम्मेदारियों का निर्वहन करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है, जबकि अन्य का मानना है कि यह एक राष्ट्रीय दायित्व है जिसे पूरी जिम्मेदारी के साथ निभाना आवश्यक है।
वहीं, प्रशासन का कहना है कि सभी व्यवस्थाएं सुचारु रूप से संचालित करने के लिए समुचित योजना बनाई जा रही है, जिससे जनगणना कार्य और शिक्षा व्यवस्था दोनों प्रभावित न हों।