इलाज से पहले इम्तिहान! मां की गोद में सांसें, 500 मीटर में जिंदगी की जंग
📍धनबाद से एक दिल दहला देने वाली तस्वीर
झारखंड के धनबाद स्थित शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (SNMMCH) से सामने आई एक तस्वीर ने स्वास्थ्य व्यवस्था की हकीकत को उजागर कर दिया है। यहां इलाज शुरू होने से पहले ही नवजात शिशुओं को जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष करना पड़ रहा है।
500 मीटर का खतरनाक सफर
अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में नवजातों के लिए समुचित पीडियाट्रिक (शिशु रोग) सुविधा उपलब्ध नहीं है। ऐसे में गंभीर हालत में जन्मे शिशुओं को इलाज के लिए करीब 500 मीटर दूर दूसरे भवन तक ले जाना पड़ता है।
इस दौरान जो दृश्य सामने आता है, वह किसी भी संवेदनशील व्यक्ति को झकझोर सकता है—
👉 मां की गोद में तड़पता नवजात
👉 साथ में भागते कर्मी, हाथ में ऑक्सीजन सिलिंडर
👉 हर कदम पर डर, हर सेकंड पर खतरा
हर पल भारी, हर देरी जानलेवा
डॉक्टरों के अनुसार नवजात शिशुओं के लिए शुरुआती कुछ मिनट बेहद अहम होते हैं। ऐसे में इलाज में थोड़ी भी देरी या रास्ते में ऑक्सीजन सपोर्ट की कमी जानलेवा साबित हो सकती है।
लेकिन यहां हालात ऐसे हैं कि इलाज शुरू होने से पहले ही बच्चों को एक जोखिम भरे सफर से गुजरना पड़ता है।
व्यवस्था पर उठे बड़े सवाल
इमरजेंसी वार्ड में ही नवजातों के लिए सुविधा क्यों नहीं?
क्या अस्पताल प्रबंधन को इस जोखिम का अंदाजा नहीं?
आखिर कब तक मरीजों की जान के साथ ऐसा खिलवाड़ होता रहेगा?
यह स्थिति न सिर्फ स्वास्थ्य व्यवस्था की कमी को दर्शाती है, बल्कि सिस्टम की संवेदनहीनता को भी उजागर करती है।
स्थानीय लोगों में नाराजगी
इस घटना के सामने आने के बाद स्थानीय लोगों और परिजनों में भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि सरकार और प्रशासन को इस ओर तुरंत ध्यान देना चाहिए, ताकि भविष्य में किसी मासूम की जान इस तरह जोखिम में न पड़े।
👉 आपकी क्या राय है?
क्या ऐसी स्थिति में जिम्मेदारी तय होनी चाहिए? कमेंट में जरूर बताएं।