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रावली नाडी में दिखा बदलता भारत प्लास्टिक मुक्त व्यवस्था

तांबे के लोटों से जलसेवा और भोजन की बर्बादी रोकने का प्रेरक अभियान

धोरीमन्ना रावली नाडी क्षेत्र में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में पर्यावरण सेवकों ने पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक जिम्मेदारी की नई मिसाल पेश की। इस आयोजन के माध्यम से न केवल लोगों को जागरूक किया गया बल्कि व्यावहारिक रूप से यह दिखाया गया कि छोटे-छोटे बदलाव अपनाकर भी बड़े स्तर पर पर्यावरण की रक्षा की जा सकती है।
कोशिश पर्यावरण सेवक टीम सांचौरी-मालाणी के सह-प्रभारी व स्टेट अवार्डी शिक्षक जगदीश प्रसाद विश्नोई ने बताया कि कार्यक्रम के दौरान पर्यावरण संरक्षण पर आधारित एक विस्तृत प्रदर्शनी लगाई गई जिसमें जल संरक्षण, प्लास्टिक प्रदूषण,स्वच्छता और भोजन की बर्बादी रोकने जैसे महत्वपूर्ण विषयों को सरल और प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत किया गया। प्रदर्शनी को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे और उन्होंने इन विषयों पर जानकारी प्राप्त कर जागरूकता बढ़ाई।
रावली नाडी के युवा व्यवसायी पूनमाराम ढाका के घर स्नेह मिलन आयोजन की सबसे खास पहल रही सिंगल यूज प्लास्टिक मुक्त व्यवस्था।जलसेवा के लिए प्लास्टिक बोतलों और डिस्पोजेबल कप-गिलास का पूरी तरह बहिष्कार करते हुए तांबे के लोटों से पानी पिलाया गया। यह न केवल पर्यावरण के अनुकूल है बल्कि भारतीय परंपरा और स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से भी लाभकारी माना जाता है। इसके अलावा पूरे कार्यक्रम में सिंगल यूज प्लास्टिक कप और गिलास की जगह धातु एवं मिट्टी के बर्तनों का उपयोग किया गया। इस कदम ने उपस्थित लोगों को यह संदेश दिया कि यदि हम चाहें तो आसानी से प्लास्टिक के उपयोग को कम कर सकते हैं और पर्यावरण को सुरक्षित रख सकते हैं।
पर्यावरण सेवकों ने अपने संबोधन में भोजन की बर्बादी को लेकर भी गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वे जरूरत के अनुसार ही भोजन लें और जूठन से बचें। उनका कहना था कि भोजन की बर्बादी न केवल संसाधनों की हानि है बल्कि यह पर्यावरण पर भी नकारात्मक प्रभाव डालती है।
कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे समाज के लिए प्रेरणादायक बताया।कई लोगों ने भविष्य में अपने निजी और सामाजिक आयोजनों में भी प्लास्टिक मुक्त व्यवस्था अपनाने और भोजन की बर्बादी रोकने का संकल्प लिया।
इस तरह रावली नाडी में आयोजित यह कार्यक्रम केवल एक आयोजन नहीं बल्कि एक सकारात्मक सोच और जिम्मेदार जीवनशैली की ओर बढ़ता हुआ कदम साबित हुआ जिसने यह संदेश दिया कि सामूहिक प्रयासों से ही पर्यावरण संरक्षण का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।
इस दौरान कोशिश पर्यावरण सेवक टीम के सह-प्रभारी व स्टेट अवार्डी शिक्षक जगदीश प्रसाद विश्नोई, पर्यावरण सेवक धोलाराम कपासिया, मोहनलाल गोदारा, श्रवण कुमार जाणी, सुजाराम ढाका, व्याख्याता अरमान कङवासरा सहित कई पर्यावरण सेवकों ने निस्वार्थ भाव से सेवा देते हुए समारोह में पर्यावरण संरक्षण व मानव सुधार का संदेश दिया।

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