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सपा में शामिल होने का मोस्ट निदेशक ने बताया औचित्य, विरोध करने वालों को बताया अदूरदर्शी अंधभक्त

देश भारत की संप्रभुता बचाने व संवैधानिक संस्थाओं को स्वतंत्र कराने के लिए शहीद होना चाहता हूँ : श्यामलाल

सुलतानपुर। मोस्ट निदेशक शिक्षक श्यामलाल निषाद "गुरूजी" ने समाजवादी पार्टी में शामिल होने के अपने निर्णय का औचित्य स्पष्ट करते हुए कहा कि उनका उद्देश्य देश की संप्रभुता की रक्षा करना और संवैधानिक संस्थाओं को स्वतंत्र कराना है। उन्होंने कहा कि यदि आवश्यकता पड़ी तो वह शहीद होने के लिए भी तैयार हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीयता, लोकतंत्र की जो परिभाषा चुनाव आयोग की जो विशेषता, संवैधानिक संस्थाओं की प्रतिबद्धता का जो पाठ हम बच्चों को क्लास रूम में पढ़ाते हैं वह वास्तव में देश के अंदर यथार्थ में दिखाई नहीं देता, हम संविधान में दिए गए अधिकार और कर्तव्यों के बारे में जो बातें बच्चों को क्लास रूम में पढ़ाते हैं समाज में वह नहीं दिखती। देश के संसाधनों और सत्ता न्याय पूर्ण भागीदारी आज भी नहीं दिख रही है हम चाहते हैं कि जो संविधान में है वैसा समाज में भी होना चाहिए, इसी आशा और विश्वास से हम समाजवादी पार्टी की सरकार बनाना चाहते हैं। देश भारत के संविधान में बच्चों की प्राथमिक शिक्षा की गारंटी दी गई है लेकिन उत्तर प्रदेश में एक तरफ जनसंख्या बढ़ रही है तो दूसरी तरफ प्राइमरी स्कूल बंद किए जा रहे हैं प्रदेश में प्राइमरी स्कूल बंद होने से बचाने के लिए हम मोस्ट के लोगो ने सरकार के गलत निर्णय के विरोध में विभिन्न जनपदों में भीषण प्रदर्शन भी किए किंतु मौजूदा सरकार संवैधानिक गारंटी के अनुकरण में पर्याप्त शिक्षकों की भर्ती, ग्रामीणों/पिछड़ों के बच्चों की शिक्षा के लिए बजट में वृद्धि करने के बजाय स्कूल बंद कर रही है। आज अमीर लोग यह कह कर कि गांव में शिक्षा का माहौल नहीं है अपने बच्चों को शहर भेज दे रहे हैं किंतु जो साधन संपन्न नहीं है ऐसे गरीब/पिछड़ों के बच्चों को प्राथमिक शिक्षा भी मिलना मुश्किल हो रही है योगी सरकार को इतना भी ज्ञान नहीं कि राष्ट्र का निर्माण किसी फैक्ट्री में नहीं बल्कि विद्यालयों में होता है इसी लिए हम मोस्ट के लोग प्रदेश में खास करके पूर्वांचल में निःशुल्क मोस्ट पाठशालाएं चलवाने का काम कर रहे हैं हमें उम्मीद है कि समाजवादी सत्ता में आने के बाद प्रदेश की बर्बाद की जा रही प्राथमिक शिक्षा पर विशेष ध्यान देंगे।
श्यामलाल निषाद ने कहा कि बीजेपी संविधान और संवैधानिक संस्थाओं को लोकतांत्रिक मूल्यों और नागरिक स्वतंत्रता का खत्म कर रही है देश की संप्रभुता अमेरिका के हाथों सौंप चुकी है! ऐसा लगता है कि देश भारत आज अमेरिका का उपनिवेश बनकर रह गया है, देश के संसाधनों और संपत्ति अपने चहेते चंद पूंजीपतियों के हवाले करते चले जा रहे हैं।
मोस्ट निदेशक ने कहा कि बीजेपी धर्म की आड़ में अंधविश्वास, पाखंडवाद, जाति श्रेष्ठ को बढ़ावा देकर देश की एकता और अखंडता भाई चारा को कमजोर कर रही है और जो उसके खिलाफ बोलता है उसके खिलाफ एफआईआर, निलंबन आदि का डर दिखाकर आवाज को दबाने का प्रयास कर रही है जिसका मैं खुद भुक्तभोगी रहा हूं।
इसके अलावा उन्होंने कहा कि धार्मिक उन्माद फैलाने वालों को बीजेपी राष्ट्रवादी घोषित करती है और लोकतंत्र का गला घोट कर हिंदू-मुस्लिम करके चुनाव जीत रही है। बीजेपी चुनाव आचार संहिता को तार-तार करके हिंदुत्व के नाम पर पिछड़ों का वोट तो लेती है किंतु पिछड़ों की सबसे ज्यादा शोषण अत्याचार हकमारी इसी के शासनकाल में देखा जा रहा है।
मोस्ट निदेशक ने पिछड़ों से अपील की कि बीजेपी के हिंदुत्व की रक्षा के बजाय वैज्ञानिक दृष्टिकोण का विकास, मानवता भाईचारा देश की एकता अखंडता को मजबूत करने के लिए संविधान, लोकतंत्र व संवैधानिक संथाओं को स्वतंत्र कराने, पिछड़ों को शोषण-अत्याचार से मुक्त कराने के लिए समाजवादी पार्टी के साथ मिलकर संघर्ष किया जाय।
उल्लेखनीय है कि बीते 21 अप्रैल को मोस्ट निदेशक शिक्षक श्यामलाल निषाद "गुरूजी" ने लखनऊ स्थित समाजवादी पार्टी कार्यालय जाकर राष्ट्रीय अध्यक्ष के समक्ष सपा में शामिल हो गए हैं।

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