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मानगो मेयर चुनाव पर सियासी घमासान तेज, आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी

जमशेदपुर के मानगो नगर निगम (MNAC) में मेयर चुनाव को लेकर सियासत गरमा गई है। हाल ही में मेयर बनीं सुधा गुप्ता की जीत पर सवाल उठाते हुए बीजेपी नेता नीरज सिंह ने गंभीर आरोप लगाए हैं। इस पूरे मामले ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है और विवाद चुनाव आयोग से लेकर अदालत तक पहुंच चुका है।

क्या है पूरा मामला?

बीजेपी व्यवसायी प्रकोष्ठ के प्रदेश सह-समन्वयक नीरज सिंह ने आरोप लगाया है कि मेयर चुनाव में कई स्तरों पर अनियमितताएं हुई हैं। उन्होंने न केवल चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाया है, बल्कि इसे “फर्जीवाड़े से हासिल जीत” तक करार दिया है।

नीरज सिंह ने इस मामले को लेकर चुनाव आयोग और झारखंड हाई कोर्ट में याचिका दायर कर जांच की मांग की है
मुख्य आरोप क्या-क्या हैं?

1. चुनावी कार्यालय को लेकर भ्रम फैलाने का आरोप
नीरज सिंह का कहना है कि डिमना रोड स्थित चुनावी कार्यालय को लेकर मतदाताओं को भ्रमित किया गया। जनता को यह विश्वास दिलाया गया कि जीत के बाद मेयर वहीं उपलब्ध रहेंगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

2. गलत पते पर दस्तावेज तैयार करने का आरोप
उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावी दस्तावेज Lotus Apartment के पते पर बनाए गए, जो कथित रूप से गलत है। इसे उन्होंने चुनावी नियमों का उल्लंघन बताया।

3. जनता दरबार को लेकर विवाद
नीरज सिंह ने कहा कि मानगो की जनता के लिए चुनी गई मेयर अगर बिष्टुपुर स्थित तिलक पुस्तकालय (जिसे उन्होंने राजनीतिक कार्यालय बताया) में जनता दरबार लगाती हैं, तो यह क्षेत्र की जनता के साथ अन्याय है।

4. घोषित पते पर अनुपस्थिति
आरोप है कि चुनावी दस्तावेजों में दिए गए पते पर मेयर की मौजूदगी नहीं पाई गई। स्थानीय लोगों ने भी कथित रूप से कहा कि वे वहां कभी नहीं रहती थीं।

5. स्थानीय बनाम बाहरी का मुद्दा
नीरज सिंह ने सवाल उठाया कि मानगो की समस्याओं को वही समझ सकता है जो वहां का निवासी हो, न कि कोई बाहरी व्यक्ति।

कानूनी पहलू क्या हो सकते हैं?

अगर जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत कुछ धाराएं लागू हो सकती हैं:

धोखाधड़ी (धारा 318)

जालसाजी (धारा 336)

झूठे दस्तावेज का उपयोग (धारा 340)

हालांकि, इन धाराओं का लागू होना पूरी तरह जांच और सबूतों पर निर्भर करेगा।

आगे क्या?

अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि पूर्व स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता और मेयर सुधा गुप्ता इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं। साथ ही चुनाव आयोग और अदालत की कार्रवाई भी इस पूरे मामले की दिशा तय करेगी।

💬 आपकी राय क्या है?
क्या यह मामला वाकई चुनावी गड़बड़ी का है या सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी? कमेंट में अपनी राय जरूर साझा करें।🙏

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