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संघर्ष को बनाया सीढ़ी: ससुराल की बंदिशों को ठुकराकर कीर्ति बनीं JPSC ऑफिसर

हजारीबाग: "मंजिल उन्हीं को मिलती है, जिनके सपनों में जान होती है, पंखों से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है।" इस कहावत को हजारीबाग की कीर्ति ने सच कर दिखाया है। झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) द्वारा आयोजित बाल विकास परियोजना पदाधिकारी (CDPO) परीक्षा में सफलता हासिल कर कीर्ति ने न केवल अपने जिले का मान बढ़ाया है, बल्कि उन महिलाओं के लिए एक मिसाल पेश की है जो पारिवारिक और सामाजिक दबाव के आगे हार मान लेती हैं।
​शिक्षा के लिए ससुराल का त्याग
​कीर्ति की कहानी संघर्ष और दृढ़ निश्चय की है। करीब 10 साल पहले उनकी शादी चौपारण में हुई थी। शादी के बाद वह अपनी पढ़ाई जारी रखना चाहती थीं, लेकिन ससुराल वालों ने इस पर पाबंदी लगा दी। उनके सामने दो रास्ते थे—या तो वह अपने सपनों का गला घोंट दें या फिर संघर्ष का रास्ता चुनें। कीर्ति ने अपनी शिक्षा और स्वाभिमान को चुना और ससुराल छोड़कर मायके लौट आईं।
​पिता का साथ और सामाजिक चुनौतियां
​एक बेटे की जिम्मेदारी और समाज के तानों के बीच कीर्ति के लिए यह सफर आसान नहीं था। इस कठिन दौर में उनके रिटायर्ड पुलिसकर्मी पिता उनके सबसे बड़े संबल बने। बेटी की पढ़ाई के प्रति लगन देख पिता ने उन्हें हर संभव सहयोग दिया। शांत माहौल में पढ़ाई करने के लिए कीर्ति ने गर्ल्स हॉस्टल में एक कमरा किराए पर लिया और दिन-रात मेहनत में जुट गईं।
​आर्थिक तंगी को दी मात
​तैयारी के दौरान कई बार आर्थिक तंगी और सामाजिक दबाव का सामना करना पड़ा, लेकिन कीर्ति का लक्ष्य स्पष्ट था। उन्होंने हार नहीं मानी और अंततः JPSC CDPO परीक्षा में चयनित होकर अपनी काबिलियत साबित कर दी।
​प्रेरणा का स्रोत बनी सफलता
​कीर्ति की यह सफलता आज पूरे इलाके में चर्चा का विषय है। उनकी उपलब्धि संदेश देती है कि यदि हौसला बुलंद हो और परिवार का साथ मिले, तो कोई भी बाधा मंजिल तक पहुंचने से नहीं रोक सकती। कीर्ति अब बाल विकास परियोजना पदाधिकारी के रूप में समाज की सेवा करने के लिए तैयार हैं।

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