"गिरगिट राजनीति का नया नमूना: परशुराम को भूलने वाले दामोदर यादव पर जनता का तंज"
✍️ डॉ. महेश प्रसाद मिश्रा, भोपाल
• कल तक परशुराम भक्त, आज परशुराम से अनजान
• जनता का सवाल – ‘तुम्हारी औकात क्या है?’
2019 में सोशल मीडिया पर भगवान परशुराम जयंती की शुभकामनाएं देने वाले दामोदर सिंह यादव आज वही परशुराम जी को न पहचानने का दावा कर रहे हैं। यह वही व्यक्ति है जिसने कभी परशुराम को "परम योद्धा और सत्य के धारक" कहकर सम्मानित किया था, लेकिन अब सोशल मीडिया पर ऐसे बयान दे रहा है मानो परशुराम का नाम उसने पहली बार सुना हो।
जनता इस दोहरे रवैये पर जमकर व्यंग्य कर रही है। लोग कह रहे हैं कि राजनीति में ऐसे "गिरगिट" रोज़ रंग बदलते हैं। कल तक धर्म की जय-जयकार, आज धर्म पर सवाल।
• "अगर यही तर्क है तो हम भी कह सकते हैं – दामोदर यादव कौन है, उसकी क्या औकात है?"
• "कल तक शुभकामनाएं, आज तक सवाल… ये है राजनीति का नया तमाशा।"
• "ऐसे लोग धर्म नहीं, सिर्फ अपनी कुर्सी के भक्त होते हैं।"
सनातन संस्कृति का अपमान करने वाले हर अवसरवादी को यह समझ लेना चाहिए कि समाज अब मूर्ख नहीं है। परशुराम जैसे महापुरुषों पर सवाल उठाना केवल अज्ञान नहीं, बल्कि सनातन का अपमान है। और जो लोग इस तरह की मूर्खता करेंगे, उन्हें समाज यही व्यंग्यात्मक जवाब देगा – "तुम कौन हो, तुम्हारी औकात क्या है?"