logo
Select Language
Hindi
Bengali
Tamil
Telugu
Marathi
Gujarati
Kannada
Malayalam
Punjabi
Urdu
Oriya

ज्वेलरी जगत की बुलंद आवाज़ और स्वर्णकार समाज के पथप्रदर्शक। मीडिया सम्मान से वैश्विक पहचान तक: आभूषण जगत में नए प्रतिमान गढ़ते विनोद वर्मा..

बक्सर, बिहार: सफलता की कहानियाँ अक्सर बड़े शहरों से शुरू होती हैं, लेकिन जब इरादे फौलादी हों, तो बक्सर जैसी छोटी जगह से निकलकर भी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी छाप छोड़ी जा सकती है। 'आभूषण वर्ल्ड' (Aabhushan World) के संस्थापक और संपादक विनोद वर्मा का जीवन सफर इसी संकल्प और संघर्ष की एक जीवंत मिसाल है।
संघर्षों से भरा शुरुआती सफर
विनोद वर्मा के सफर की शुरुआत एक समाजसेवी और स्वर्णकार समाज के सजग प्रहरी के रूप में हुई। उन्होंने शुरुआती दिनों में स्वर्णकारों की बुनियादी समस्याओं को प्रशासन के सामने लाने का बीड़ा उठाया। चाहे कामगारों को 'हस्तशिल्प' का दर्जा दिलाने की मांग हो या 2016 में उत्पाद शुल्क (Excise Duty) के खिलाफ ऐतिहासिक आंदोलन का नेतृत्व करना, विनोद वर्मा हमेशा अग्रिम पंक्ति में खड़े रहे।
कोरोना काल में मसीहा की भूमिका
जब 2020 में पूरी दुनिया कोरोना महामारी से सहमी हुई थी, तब विनोद वर्मा ने न केवल स्वर्णकारों की आर्थिक सुरक्षा के लिए प्रशासन से समन्वय बिठाया, बल्कि लोगों का मनोबल बढ़ाने के लिए 'विश्व कल्याण महायज्ञ' जैसे सामाजिक और धार्मिक आयोजन भी किए। उन्होंने व्यापारियों को 'धैर्य और संयम' का पाठ पढ़ाया और संकट की घड़ी में समाज को टूटने से बचाया।
'आभूषण वर्ल्ड': एक नए अध्याय की शुरुआत
वर्ष 2017 में उन्होंने ज्वेलरी जगत को एक नया मंच देने के उद्देश्य से 'आभूषण वर्ल्ड' पत्रिका की नींव रखी। एक क्षेत्रीय प्रयास से शुरू हुई यह पत्रिका आज भारत के दर्जनों राज्यों के हजारों ज्वैलर्स की पहली पसंद बन चुकी है। यह केवल एक मैगज़ीन नहीं, बल्कि ज्वेलरी उद्योग की समस्याओं, नवाचारों और कला को दुनिया के सामने रखने का एक सशक्त माध्यम है।
अंतरराष्ट्रीय पहचान और सम्मान
विनोद वर्मा की दूरदर्शिता का ही परिणाम है कि आज 'आभूषण वर्ल्ड' दुबई, बैंकॉक और तुर्की जैसे अंतरराष्ट्रीय ज्वेलरी एक्सपो में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रही है। हाल ही में मुंबई में आयोजित IIJS Premiere 2025 में उन्हें उनके पत्रकारिता और मीडिया क्षेत्र में अभूतपूर्व योगदान के लिए 'Media Felicitation Award' से नवाजा गया, जो बिहार और पूरे स्वर्णकार समाज के लिए गौरव का क्षण था।
आज विनोद वर्मा का नाम न केवल एक सफल संपादक के रूप में लिया जाता है, बल्कि वे ज्वेलरी ट्रेड और कारीगरों के बीच एक सेतु का कार्य कर रहे हैं। उनका लक्ष्य भारतीय कारीगरी (हस्तशिल्प) को दुनिया के सबसे बड़े बाजारों में वह सम्मान दिलाना है, जिसकी वे हकदार हैं।
* व्यापारी सुरक्षा और प्रशासनिक समन्वय के स्तंभ *
विनोद वर्मा का योगदान केवल मीडिया और व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि वे स्वर्ण व्यवसायियों की सुरक्षा और उनके अधिकारों के लिए एक 'ढाल' के रूप में खड़े रहते हैं। बक्सर और आस-पास के क्षेत्रों में व्यापारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए वे लगातार पुलिस प्रशासन और वरिष्ठ अधिकारियों (SP/DM) के साथ संवाद बनाए रखते हैं। उनका मानना है कि जब तक व्यापारी खुद को सुरक्षित महसूस नहीं करेगा, तब तक उद्योग का विकास संभव नहीं है। यही कारण है कि आज संकट के समय में पूरा स्वर्णकार समाज और ज्वेलरी ट्रेड उनके नेतृत्व की ओर बड़े भरोसे के साथ देखता है।
तकनीकी नवाचार और भविष्य का विजन
बदलते समय के साथ कदम मिलाते हुए, विनोद वर्मा अब 'आभूषण वर्ल्ड' को डिजिटल क्रांति के साथ जोड़ रहे हैं। उनका विजन भारतीय ज्वेलरी उद्योग को ई-कॉमर्स और आधुनिक तकनीक से लैस करना है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों के छोटे कारीगरों की कला को भी वैश्विक खरीदार मिल सकें। वे आने वाले समय में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़े व्यापारिक सम्मेलनों (Exhibitions) की योजना बना रहे हैं, जिसका मुख्य उद्देश्य छोटे शहरों के ज्वेलरी ब्रांड्स को एक ऐसा मंच प्रदान करना है जहाँ वे बड़े वैश्विक खिलाड़ियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हो सकें।
"सफलता किसी पुरस्कार तक सीमित नहीं है, असली सफलता वह है जब आपके प्रयासों से समाज के अंतिम व्यक्ति के जीवन में सुधार आए।" - विनोद वर्मा

46
1772 views

Comment