मूर्ख किसे बनाते हो
मूर्ख किसे मानते हो सिर्फ अपनी चुनावी माहौल बनाते हो
जब 543 सीट है तो 850 क्यों बनाते हो और अपने फायदे के लिए जनता को कर्ज में डूबते हो ,
महिला बिल के नाम पर सीट बढ़ाने वाली फार्मूला क्यों अपनाते हो ।
और जब देश की अस्मिता की बात देश की सबसे बड़ी लोकतंत्र की मंदिर में बैठकर इस तरह की गद्दारी की पाठ पढ़ाते हो।
जनता जान चुकी है आपकी चेहरा सबको दिख रहा है ।
जनता सीख रही है चेहरे पढ़ने का हुनर क्योंकि सुना है किताबों से ज्यादा चेहरे पर लिखा होता है। हिंदुस्तान की तमाम नेताओं की चेहरा जनता पढ़ रही है और अपने अस्मिता और हक की चश्मे से साफ उनकी चेहरा को देख पा रही है।