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सार्वजनिक विषय: श्री ज्वालामुखी मंदिर मेले के नाम पर फर्जी 'मेला समिति' और 'अध्यक्षता' का पर्दाफाश

सार्वजनिक
विषय: श्री ज्वालामुखी मंदिर मेले के नाम पर फर्जी 'मेला समिति' और 'अध्यक्षता' का पर्दाफाश

नव युवकों को समिति के नाम पर अपने जाल में फसाने का तरीका सोची समझी साजिश लगती है जिससे लोग इसके इर्द गिर्द घूमते रहे

समस्त क्षेत्रवासियों एवं श्रद्धालुओं को सूचित किया जाता है:

शक्तिपीठ माँ ज्वालामुखी मंदिर, शक्तिनगर में लगने वाले पौराणिक एवं परंपरागत मेले के नाम पर कुछ व्यक्तियों द्वारा स्वयं को 'मेला समिति का अध्यक्ष' या 'पदाधिकारी' बताकर समाज को भ्रमित करने और निजी लाभ हेतु ठगने का प्रयास किया जा रहा है। इस संबंध में सूचना का अधिकार (RTI) के माध्यम से प्रशासन द्वारा प्राप्त आधिकारिक जानकारी निम्नलिखित तथ्यों को स्पष्ट करती है:
1. आधिकारिक पुष्टि (प्रशासनिक जवाब):

एसडीएम कार्यालय के जन सूचना अधिकारी (तहसीलदार) ने अपने पत्रांक-07/2026 दिनांक 16 अप्रैल 2026 के माध्यम से स्पष्ट किया है कि:

बीते 5 वर्षों में प्रशासन द्वारा ज्वालामुखी मेला हेतु किसी भी समिति का गठन नहीं किया गया है।

यह मेला पूर्णतः परंपरागत रूप से स्वतः चलता है।

मेले के आयोजन में किसी भी संस्था या निजी समिति का कोई हस्तक्षेप नहीं है।

2. तथाकथित 'समिति' की सच्चाई:

प्रशासनिक उत्तर से यह सिद्ध हो चुका है कि जो लोग स्वयं को मेला समिति का अध्यक्ष, संरक्षक या पदाधिकारी बता रहे हैं, वे केवल समाज में अपना वर्चस्व दिखाने और लोगों को भ्रमित करने के लिए षड्यंत्र रच रहे हैं। ऐसी कोई भी समिति सरकारी रिकॉर्ड में अस्तित्व में नहीं है।
3. मेले की अव्यवस्था और न्यायालय की कार्यवाही:

मंदिर के प्राधिकृत पुजारी हेमंत मिश्रा के अनुसार, पूर्व में होने वाली नीलामी प्रक्रिया पर माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद द्वारा रोक लगाई गई थी। तब से कुछ तथाकथित समाजसेवी 'अध्यक्ष' बनकर मेले में दुर्व्यवस्था फैला रहे हैं। आज भी मेला परिसर मूलभूत सुविधाओं जैसे:

शुद्ध पेयजल, सुलभ शौचालय, समुचित प्रकाश व्यवस्था, पार्किंग एवं वैकल्पिक मार्गों के अभाव से जूझ रहा है।

4. अपील:

हम समाज के प्रबुद्ध नागरिकों और श्रद्धालुओं से अपील करते हैं कि वे ऐसे पाखंडी और भ्रम फैलाने वाले तत्वों से सावधान रहें। समाज सेवा सच्चाई और सेवा भाव से होती है, न कि झूठी मनगढ़ंत अध्यक्षता और दलाली से।

इन अव्यवस्थाओं और समाज को गुमराह करने वालों के विरुद्ध जल्द ही न्यायालय के माध्यम से कानूनी कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी।

"समाज सेवा सच्चाई से होती है, भ्रम पैदा करने कराने से।।

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