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शीर्षक: महिला आरक्षण पर राजनीति नहीं, वास्तविक प्रतिनिधित्व चाहिए — मुमताज़ पटेल

नई दिल्ली। महिला आरक्षण को लेकर देश की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। उभरती हुई युवा नेता Mumtaz Patel (मुमताज़ पटेल) ने केंद्र सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा है कि यदि वर्ष 2023 में महिला आरक्षण विधेयक सर्वसम्मति से पारित हो चुका था, तो आज उसे “ऐतिहासिक” बताकर दोबारा प्रस्तुत करने की आवश्यकता क्यों पड़ रही है।

मुमताज़ पटेल ने अपने बयान में स्पष्ट कहा कि देश की महिलाओं को केवल प्रतीकात्मक घोषणाओं से संतुष्ट नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि “जब पूरा सदन एकजुट था, तब इस कानून को लागू करने की इच्छाशक्ति कहाँ थी? आखिर जनगणना और परिसीमन का बहाना बनाकर इसे टालने की जरूरत क्यों पड़ी?” उनके अनुसार यह दर्शाता है कि महिलाओं के सशक्तिकरण के नाम पर राजनीति की जा रही है।

उन्होंने आगे कहा कि देश की महिलाएं अब केवल हेडलाइन नहीं, बल्कि अपने अधिकारों की वास्तविक भागीदारी चाहती हैं। “हमें प्रतीकवाद नहीं, बल्कि संसद और विधानसभाओं में ठोस और प्रभावी प्रतिनिधित्व चाहिए,” उन्होंने जोर देते हुए कहा। मुमताज़ पटेल ने सरकार से पारदर्शिता के साथ-साथ जवाबदेही की भी मांग की और कहा कि महिलाओं को गुमराह करने की कोशिशें अब सफल नहीं होंगी।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के बयानों से महिला आरक्षण का मुद्दा आगामी चुनावों में एक महत्वपूर्ण विषय बन सकता है। वहीं, मुमताज़ पटेल का यह रुख उन्हें एक सशक्त और स्पष्टवादी नेता के रूप में स्थापित कर रहा है, जो महिला अधिकारों के मुद्दे पर खुलकर अपनी बात रख रही हैं।

✍🏻 ऋषभ पराशर, राष्ट्रीय अध्यक्ष, AIMA मीडिया युवा प्रकोष्ठ.

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