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दाल मंडी में “विकास” या “विनाश”? — कॉरिडोर के नाम पर मकानों पर बुलडोज़र, मुआवजा गायब!


वाराणसी के ऐतिहासिक दाल मंडी क्षेत्र में इन दिनों “विकास” के नाम पर जो हो रहा है, उसने इंसानियत और प्रशासनिक जवाबदेही—दोनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
22-22 फीट कब्ज़ा, लोगों के घर उजड़ रहे!
स्थानीय लोगों के अनुसार, कॉरिडोर विस्तार के नाम पर गली के दोनों तरफ लगभग 22-22 फीट तक जमीन ली जा रही है। इसका सीधा असर—सैकड़ों परिवारों के सिर से छत छिनने का खतरा।
अच्छे मकानों को “जर्जर” बताकर तोड़ने का आरोप
सबसे बड़ा आरोप—बढ़िया हालत में बने मकानों को अचानक “जर्जर” घोषित कर दिया गया।
हैरानी की बात यह कि जिन अधिकारियों ने 2 साल पहले इन्हीं मकानों का नक्शा पास किया, आज वही उन्हें तोड़ने की वजह बता रहे हैं!
मुआवजा नहीं देना पड़े, इसलिए खेल?
पीड़ितों का सीधा आरोप है—
“मुआवजा देने से बचने के लिए मकानों को जर्जर घोषित किया जा रहा है।”
“ना सही नोटिस, ना पारदर्शिता—बस सीधा एक्शन!”
परिवार सड़क पर, प्रशासन खामोश
कई परिवारों का कहना है कि:
उन्हें कोई स्पष्ट लिखित आदेश नहीं दिया गया
ना ही वैकल्पिक व्यवस्था की जानकारी
अचानक कार्रवाई से लोग बेघर होने की कगार पर
सबसे बड़ा सवाल — जाएं तो जाएं कहां?
जब प्रशासन ही सुनवाई न करे, तो आम जनता न्याय के लिए किस दरवाजे पर जाए?
यह सवाल आज हर प्रभावित परिवार के दिल में गूंज रहा है।
तस्वीरें बोल रही हैं सच्चाई
घटनास्थल की तस्वीरें और वीडियो सामने आए हैं, जो दिखाते हैं कि कैसे लोगों का जीवन भर का सपना मिनटों में मलबे में बदला जा रहा है।
जनता की मांग:
तत्काल ध्वस्तीकरण पर रोक
निष्पक्ष जांच
उचित मुआवजा और पुनर्वास
जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई
अगर यह “विकास” है, तो फिर “विनाश” किसे कहेंगे?

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