*तवा गरम है… पर रोटी कौन सेक रहा है?— लाल टोपी राजू सोनी*
*तवा गरम है… पर रोटी कौन सेक रहा है?— लाल टोपी राजू सोनी*
नई दिल्ली। लोकतंत्र के मंदिर में 21 घंटे तक चली बहस, 500 से ज्यादा वोट, और आखिर में नतीजा—“न बिल पास हुआ, न बात साफ हुई।” जी हाँ, संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 लोकसभा में गिर गया। सरकार को चाहिए थे 352 वोट, मिले 298। विरोध में 230 वोट पड़े और 54 वोटों से “महिला आरक्षण और परिसीमन” का यह बहुचर्चित बिल इतिहास के ड्राफ्ट में ही अटक गया।
अब सवाल यह नहीं कि बिल क्यों गिरा…सवाल यह है कि “यह गिराया किसने और उठाएगा कौन?”
सरकार का कहना है—“महिला सशक्तिकरण की राह में विपक्ष ने रोड़ा अटकाया।”विपक्ष का जवाब—“बिल में पारदर्शिता नहीं थी, यह चुनावी स्टंट था।”
और जनता?वह अब भी सोच रही है कि “33% आरक्षण का वादा 2023 में हुआ था, लागू 2026 में भी नहीं हुआ—तो फिर यह नया अध्याय क्यों?”
प्रधानमंत्री ने देश से माफी मांगी। माफी किस बात की—बिल न पास कराने की या समय से पहले लाने की—यह स्पष्ट नहीं हुआ। वहीं गृहमंत्री ने विपक्ष को “महिला विरोधी” बता दिया। अब राजनीति में आरोपों का यह पिंग-पोंग खेल नया नहीं है, लेकिन इस बार मुद्दा गंभीर था—महिलाओं की भागीदारी का।
कांग्रेस ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि “जब आरक्षण पहले ही पास हो चुका है, तो नया बिल क्यों? क्या यह सिर्फ चुनावी मंच सजाने का प्रयास है?”उधर भाजपा का कहना है कि “विपक्ष की नीयत में ही खोट है, इसलिए बिल रोका गया।”
सच्चाई क्या है?शायद यह कि “तवा तो सच में गरम है… पर रोटी सेकने की होड़ में आटा ही जल गया।”
विशेषज्ञों की राय भी कम दिलचस्प नहीं। उनका कहना है कि—
पहले जनगणना होनी चाहिए
फिर परिसीमन
उसके बाद आरक्षण लागू
लेकिन राजनीति में “पहले क्या” और “बाद में क्या”—यह तय अक्सर जनता नहीं, चुनाव तय करते हैं।
आज हाल यह है कि हर पार्टी महिलाओं की बात कर रही है, लेकिन महिलाओं की सीट तय करने से पहले अपनी सीट बचाने में लगी है।आरक्षण का असली उद्देश्य—समान भागीदारी—कहीं पीछे छूटता दिख रहा है।
अगर सच में समाधान चाहिए, तो सर्वदलीय बैठक हो, सभी वर्गों—सामान्य, ओबीसी, एससी, एसटी, अल्पसंख्यक—की महिलाओं के लिए स्पष्ट सीटें तय हों, और चुनावी मौसम से दूर शांत माहौल में निर्णय लिया जाए।
वरना यह सिलसिला चलता रहेगा—बहस होगी, बयान आएंगे, माफी मांगी जाएगी…और अंत में जनता पूछेगी—“हमारे नाम पर राजनीति कब तक?
फिलहाल, लाल टोपी राजू सोनी यह मानने को तैयार नहीं कि यह सिर्फ हार या जीत का मामला है।यह मामला है—नीयत बनाम राजनीति का।
और अंत में एक सीधी बात—“तवा गरम है, रोटी भी है… पर भूखी जनता अब तमाशा नहीं, नतीजा चाहती है।
*Devashish Govind Tokekar*
*VANDE Bharat live tv news Nagpur*
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