ये 'ठेकेदार' सामान्य जाति वालों को कह रहे हैं क्या? आपके दलित प्रेम से किसी को दिक्कत नहीं है, दलित प्रेम के नाम पर आप समान्य जाति से जो 'हिसाब चुकता'
ये 'ठेकेदार' सामान्य जाति वालों को कह रहे हैं क्या? आपके दलित प्रेम से किसी को दिक्कत नहीं है, दलित प्रेम के नाम पर आप समान्य जाति से जो 'हिसाब चुकता' वाली प्रतिशोध की राजनीति कर रहे हो, पूरे मानव समाज को इससे दिक्कत है! क्योंकि लोकतंत्र में प्रतिशोध के लिए कोई जगह नहीं है!