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पर्स में छुपी थी 40,000 की काली कमाई — पूर्णियाँ में निगरानी का दूसरे दिन भी बड़ा वार



विजय कुमार | वरिष्ठ पत्रकार

पूर्णियाँ के पूर्व अंचल कार्यालय का अभिलेखागार। सरकारी फाइलों की आड़ में चल रहा था एक अलग ही "कारोबार"
भूमि रोक की जाँच करने के नाम पर रिश्वत वसूली। लेकिन 17 अप्रैल 2026 को निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की मुख्यालय टीम ने उस "कारोबार" पर ताला जड़ दिया — रंगे हाथ, 40,000 रुपए की गड्डी सहित।

यह कार्रवाई सिर्फ एक गिरफ्तारी नहीं है। यह उस पूरे तंत्र पर चोट है जहाँ आम नागरिक अपनी ज़मीन के कागज़ों के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटता है और घूस न देने पर उसकी फाइल महीनों "लंबित" रहती है।
क्या है पूरा मामला?
परिवादी श्री सूरज सहनी, पिता स्व0 सौदागर सहनी, गुलाबबाग हांसदा, पूर्णियाँ ने निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, बिहार, पटना के कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई कि अंचल कार्यालय पूर्णियाँ पूर्व के राजस्व कर्मचारी लाल बाबू रजक उनकी भूमि रोक से संबंधित मामले की जाँच कर प्रतिवेदन समर्पित करने के एवज में रिश्वत की माँग कर रहे हैं।
ब्यूरो ने शिकायत का सत्यापन कराया। सत्यापन में आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए गए। इसके बाद निगरानी थाना कांड सं0-045/26, दिनांक 16.04.2026 अंकित किया गया।
धावादल का गठन और कार्रवाई
अनुसंधानकर्ता श्री अमरेन्द्र प्रसाद विद्यार्थी, पुलिस उपाधीक्षक, निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, पटना के नेतृत्व में विशेष धावादल गठित किया गया।
17 अप्रैल 2026 को तय योजना के तहत रिश्वत की राशि दी गई और धावादल ने दोनों अभियुक्तों को मौके पर ही दबोच लिया:
प्राथमिकी अभियुक्त: श्री लाल बाबू रजक, राजस्व कर्मचारी, अंचल कार्यालय पूर्णियाँ पूर्व
अप्राथमिकी अभियुक्त: श्रीमती रूमी कुण्डु — जो हल्का कार्यालय में निजी तौर पर कर्मचारी की सहायता करती थीं और जिनके पर्स में ही रिश्वत की पूरी रकम छुपाकर रखी गई थी।
दोनों को 40,000 (चालीस हजार रुपए) रिश्वत लेते हुए पूर्णियाँ पूर्व अंचल कार्यालय के अभिलेखागार से गिरफ्तार किया गया। पूछताछ के उपरांत उन्हें माननीय विशेष न्यायालय, निगरानी, भागलपुर में उपस्थापित किया जाएगा।
पूर्णियाँ में लगातार दो दिन — निगरानी का तूफान
यह पूर्णियाँ में निगरानी की लगातार दूसरे दिन की कार्रवाई थी। एक दिन पहले 16 अप्रैल को भी निगरानी की टीम ने बिहार शिक्षा परियोजना के सहायक अभियंता भूषण प्रसाद को ₹10,000 रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया था।
दो दिन, दो विभाग, दो गिरफ्तारियाँ — पूर्णियाँ के सरकारी दफ्तरों में खलबली मच गई है।
2026 में निगरानी की रिकॉर्ड तोड़ कार्रवाई
निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने जनवरी-फरवरी 2026 के दौरान ही भ्रष्टाचार से जुड़े 28 मामलों में मुकदमा दर्ज किया — जो 2024 की इसी अवधि के 10 मामलों की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक है।
यह आँकड़े बताते हैं कि निगरानी अन्वेषण ब्यूरो अब सिर्फ प्रतीकात्मक कार्रवाई नहीं कर रहा — यह भ्रष्टाचार के खिलाफ एक सुनियोजित अभियान है।

भूमि रिकॉर्ड और राजस्व विभाग बिहार में भ्रष्टाचार का सबसे पुराना अड्डा रहा है। जमीन की जाँच हो, नक्शा चाहिए हो, या दाखिल-खारिज करवाना हो — बिना "नेग" के काम नहीं होता, यह धारणा दशकों से चली आ रही है।
लाल बाबू रजक का मामला इस धारणा की एक और कड़ी है। लेकिन इस बार अंतर यह है कि सूरज सहनी ने घूस देने की जगह शिकायत दर्ज कराई। और निगरानी ने कार्रवाई की।
यही वह रास्ता है जो हर पीड़ित नागरिक को अपनाना होगा। जब तक शिकायतें नहीं होंगी, रिश्वत का "कारोबार" यूँ ही चलता रहेगा — फाइलों की धूल के पीछे, अभिलेखागार के अंधेरे में।
निगरानी ब्यूरो का नंबर है — और शिकायत ही सबसे बड़ा हथियार।
केस विवरण संक्षेप
विवरण
तथ्य
निगरानी कांड सं0
045/26, दि0 16.04.2026
गिरफ्तारी तिथि
17 अप्रैल 2026
प्राथमिकी अभियुक्त
लाल बाबू रजक, राजस्व कर्मचारी
अप्राथमिकी अभियुक्त
श्रीमती रूमी कुण्डु
परिवादी
सूरज सहनी, गुलाबबाग हांसदा, पूर्णियाँ
रिश्वत राशि
₹40,000
गिरफ्तारी स्थान
अभिलेखागार, अंचल कार्यालय पूर्णियाँ पूर्व
अनुसंधानकर्ता
DSP अमरेन्द्र प्रसाद विद्यार्थी, NIB पटना
पेशी न्यायालय
विशेष न्यायालय, निगरानी, भागलपुर

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