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लोकसभा में संविधान संशोधन विधेयक गिरा: 298 समर्थन के बावजूद नहीं मिला दो-तिहाई बहुमत, विपक्ष-सरकार आमने-सामने

नई दिल्ली, 17 अप्रैल 2026 — संसद के विशेष सत्र में शुक्रवार को संविधान संशोधन से जुड़ा एक अहम विधेयक लोकसभा में पारित नहीं हो सका। यह विधेयक वर्ष 2029 से महिलाओं को विधायिकाओं में आरक्षण देने और लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने से संबंधित था।

गृह मंत्री अमित शाह के जवाब के बाद सदन में विधेयक पर मतदान कराया गया। कुल 528 सांसदों ने मतदान में हिस्सा लिया, जिसमें 298 सांसदों ने विधेयक के पक्ष में वोट दिया, जबकि 230 सांसदों ने इसका विरोध किया। कोई भी सदस्य अनुपस्थित या तटस्थ नहीं रहा। हालांकि, संविधान संशोधन के लिए आवश्यक दो-तिहाई बहुमत नहीं मिलने के कारण विधेयक पारित नहीं हो सका।

सरकार ने इसके बाद स्पष्ट किया कि वह इस विधेयक से जुड़े अन्य दो प्रस्तावों को आगे नहीं बढ़ाएगी, क्योंकि ये सभी एक व्यापक परिसीमन (Delimitation) पैकेज का हिस्सा हैं और इन्हें अलग-अलग नहीं देखा जा सकता।

संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने इसे “महत्वपूर्ण सुधार पर सहमति बनाने का चूका हुआ अवसर” बताते हुए निराशा जताई।

वहीं, गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि सांसदों और मतदाताओं के अनुपात में असंतुलन को परिसीमन के जरिए सुधारा जा सकता है। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि उसने अपने शासनकाल में परिसीमन को टालकर जनता को इससे वंचित रखा।

दूसरी ओर, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने विधेयक पर तीखा हमला बोला। उन्होंने इसे सरकार की “घबराहट में लिया गया कदम” बताया और कहा कि इसका महिलाओं के आरक्षण से कोई वास्तविक संबंध नहीं है, बल्कि यह देश के चुनावी नक्शे को बदलने की कोशिश है।

राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि इस विधेयक के जरिए दक्षिणी, पूर्वोत्तर और छोटे राज्यों का प्रतिनिधित्व कम करने की कोशिश की जा रही है, जिसे उन्होंने “राष्ट्र-विरोधी कदम” करार दिया। उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष इस “राष्ट्र की संरचना पर हमले” को हर हाल में रोकेगा और “इस विधेयक को यहीं पर पराजित करेगा”।

इस पूरे घटनाक्रम के बाद साफ है कि महिलाओं के आरक्षण और परिसीमन जैसे संवेदनशील मुद्दों पर राजनीतिक सहमति फिलहाल दूर नजर आ रही है, और आने वाले समय में इस पर बहस और तेज होने की संभावना है।

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