किसान की आवाज उठाना पड़ा भारी: सरकारी दफ्तर में पत्रकार के साथ मारपीट
CHITRASEN GHRITLAHRE, AIMA MEDIA//लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर एक बार फिर गंभीर हमला सामने आया है। देश कर्तव्य मीडिया के मुख्य कार्यकारी संपादक पोषराम साहू के साथ सरकारी कार्यालय के अंदर ही मारपीट की घटना ने पूरे क्षेत्र में सनसनी फैला दी है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, घटना गुरुवार सुबह लगभग 10:30 बजे की है, जब पोषराम साहू अपने वकील जनक बरेठ के साथ अपनी माता के PM किसान सम्मान निधि से जुड़ी समस्या को लेकर जिला कृषि विकास विभाग कार्यालय पहुंचे थे। उनका उद्देश्य किसान की समस्या का समाधान कराना और संबंधित अधिकारियों से जवाब लेना था।
शुरुआत में उप संचालक कृषि अधिकारी आशुतोष श्रीवास्तव से शांतिपूर्ण चर्चा हुई। उनके निर्देश पर REO अधिकारी प्रवीण पटेल को बुलाया गया और सभी को दूसरे कक्ष में ले जाकर बातचीत शुरू की गई।
बताया जाता है कि जब पत्रकार ने लंबित आवेदन का हवाला देते हुए शीघ्र समाधान की मांग की और आवश्यकता पड़ने पर मामले को कलेक्टर तक ले जाने की बात कही, तभी माहौल अचानक बदल गया।
आरोप है कि REO अधिकारी प्रवीण पटेल ने आपा खोते हुए अचानक पोषराम साहू का कॉलर पकड़ लिया और उनके साथ मारपीट शुरू कर दी। घटना के दौरान उन्हें शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया और मानसिक रूप से भी आघात पहुंचाया गया।
चौंकाने वाली बात यह रही कि मौके पर मौजूद अन्य कर्मचारी और स्वयं उप संचालक अधिकारी आशुतोष श्रीवास्तव पूरे घटनाक्रम को देखते रहे, लेकिन किसी ने भी हस्तक्षेप कर स्थिति को संभालने की कोशिश नहीं की। इससे प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
पीड़ित पत्रकार का आरोप है कि मारपीट के दौरान उन्हें जबरन रोका गया, डराया-धमकाया गया और अपमानजनक व्यवहार किया गया।
घटना का वीडियो भी सामने आने की बात कही जा रही है, जो पूरे मामले की सच्चाई उजागर करने में अहम साक्ष्य साबित हो सकता है।
यह घटना न केवल एक पत्रकार पर हमला है, बल्कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और स्वतंत्र पत्रकारिता पर भी सीधा प्रहार माना जा रहा है।
अब सवाल उठता है—
क्या किसान की आवाज उठाना गुनाह है?
क्या सरकारी दफ्तरों में सच बोलने की सजा मारपीट है?
यदि इस मामले में सख्त कार्रवाई नहीं की जाती है, तो यह घटना प्रशासनिक व्यवस्था और कानून-व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करेगी।