महिला आरक्षण बिल: राजनीति के केंद्र में नया तूफान
Rewritten by : Shekh Jamirul Haque Khan Choudhary
संसद के विशेष सत्र में 16 अप्रैल को महिला आरक्षण से जुड़े तीन महत्वपूर्ण संशोधनों को पेश किया गया है। सरकार की योजना है कि वर्ष 2029 से लोकसभा और सभी राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू कर दिया जाए। इसी उद्देश्य के लिए संसद का तीन दिवसीय विशेष सत्र बुलाया गया है।
प्रमुख प्रस्ताव और बदलाव
सीटों में वृद्धि: नए प्रस्ताव के तहत लोकसभा की कुल सीटों की संख्या बढ़ाकर 850 करने का विचार है।
आरक्षित सीटें: यदि यह संशोधन पास होता है, तो लोकसभा की 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।
राज्यों की स्थिति: राज्यों में अधिकतम 815 सीटें और केंद्र शासित प्रदेशों में 35 सीटें निर्धारित की जा सकती हैं।
परिसीमन का मुद्दा: सरकार नए जनगणना के आंकड़ों के आधार पर परिसीमन (Delimitation) की प्रक्रिया शुरू करना चाहती है, ताकि सीटों का बँवारा सही अनुपात में हो सके।
राजनीतिक खींचतान और चुनौतियाँ
जहाँ एक तरफ सरकार इसे 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' के जरिए महिलाओं के सशक्तिकरण के रूप में देख रही है, वहीं विपक्षी दल (कांग्रेस, सपा, टीएमसी, आदि) इसे भाजपा की चुनावी रणनीति बता रहे हैं।
दक्षिण भारत का विरोध: दक्षिण भारतीय राज्यों ने जनसंख्या के आधार पर परिसीमन पर आपत्ति जताई है। उनका मानना है कि इससे उत्तर भारतीय राज्यों का दबदबा बढ़ जाएगा।
कोटा के भीतर कोटा: ओबीसी (OBC) महिलाओं के लिए अलग से आरक्षण के प्रावधान को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं।
संवैधानिक प्रक्रिया: इन विधेयकों को पारित करने के लिए विशेष बहुमत की आवश्यकता होगी, जो सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती है।
इतिहास पर एक नज़र
महिला आरक्षण का संघर्ष दशकों पुराना है:
1931: पहली बार महिलाओं की राजनीति में भागीदारी पर चर्चा हुई।
1993: 73वें और 74वें संशोधन के जरिए पंचायतों और नगर निकायों में महिलाओं को आरक्षण मिला।
1996-2008: देवगौड़ा, वाजपेयी और मनमोहन सिंह की सरकारों ने भी प्रयास किए, लेकिन आपसी सहमति की कमी और हंगामे के कारण बिल पारित नहीं हो सका।
2023: मोदी सरकार ने 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' पेश किया जिसे अब जमीन पर उतारने की तैयारी है।
निष्कर्ष
लेखक (रोहित माहेश्वरी) के अनुसार, इन विधेयकों को पास कराना आसान नहीं होगा क्योंकि इसके लिए संविधान के अनुच्छेद 368 के तहत संसद के दोनों सदनों में विशेष बहुमत की जरूरत है। राजनीतिक दल परिसीमन और जनगणना के मुद्दे पर सरकार को घेरने की तैयारी में हैं, जिससे आने वाले दिनों में संसद में गहमागहमी बढ़ने के पूरे आसार हैं।