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“मुफ्तखोरी की राजनीति बनाम विकास का सच: क्या देश ‘वोट बैंक’ के लिए गिरवी रखा जा रहा है?”


✍️ डॉ. महेश प्रसाद मिश्रा, भोपाल

भारत आज एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है जहां “विकसित भारत” के सपने और “मुफ्त योजनाओं” की हकीकत के बीच गहरी खाई नजर आने लगी है। पिछले एक दशक में सरकार ने करोड़ों लोगों तक मुफ्त राशन, आवास, गैस, शौचालय जैसी योजनाएं पहुंचाईं—इसे उपलब्धि बताया गया।
लेकिन असली सवाल यह है—
क्या यह सशक्तिकरण है या सुनियोजित निर्भरता?

🔴 आंकड़े जो चौंकाते हैं- जब हम खर्च का विश्लेषण करते हैं, तो तस्वीर साफ दिखती है:
• फ्री स्कीम्स पर भारी खर्च
• जबकि शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और रिसर्च जैसे क्षेत्रों पर तुलनात्मक रूप से कम निवेश
यानी—
👉 तात्कालिक राहत पर फोकस
👉 लेकिन दीर्घकालिक विकास पर समझौता, क्या यही “नया भारत” है?
⚠️ क्या वोट बैंक बन रहा है नीति का आधार?
मुफ्त योजनाएं जरूरतमंदों के लिए जरूरी हैं—इसमें कोई दो राय नहीं।
लेकिन जब ये योजनाएं लगातार बढ़ती जाएं और रोजगार, शिक्षा, स्किल और इनोवेशन पीछे छूट जाएं, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है—क्या नीतियां देश के विकास के लिए बन रही हैं या वोट बैंक को स्थायी बनाने के लिए?

🚨 “आत्मनिर्भर भारत” या “असेंबलिंग भारत”?
सरकार ने “आत्मनिर्भर भारत” का नारा दिया, लेकिन जमीनी हकीकत में—
• कई सेक्टर अभी भी आयात पर निर्भर
• PLI योजनाओं का लाभ बड़े कॉरपोरेट्स तक सीमित रहने के आरोप
• घरेलू तकनीकी विकास की गति अपेक्षित स्तर तक नहीं
अगर हम खुद तकनीक नहीं बना पा रहे, तो आत्मनिर्भरता का दावा कितना मजबूत है?

🔬 रिसर्च और डिफेंस: सबसे बड़ी अनदेखी
किसी भी महाशक्ति की नींव उसके Research & Development पर टिकी होती है।
लेकिन जब R&D पर सीमित खर्च हो और उन्नत तकनीक के लिए हमें विदेशी देशों पर निर्भर रहना पड़े, तो यह केवल आर्थिक नहीं, बल्कि रणनीतिक कमजोरी भी है।
⚖️ समाज में बढ़ता असंतुलन
देश में एक और खतरनाक प्रवृत्ति उभर रही है—
👉 आर्थिक असमानता
👉 अवसरों की कमी
👉 और वर्गों के बीच बढ़ती दूरी
अगर विकास के अवसर समान रूप से नहीं मिलेंगे, तो असंतोष बढ़ेगा—और यह किसी भी राष्ट्र के लिए अच्छा संकेत नहीं है।
🛑 असली प्राथमिकता क्या होनी चाहिए?
140 करोड़ की आबादी वाले देश को चाहिए:
✔ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा
✔ मजबूत स्वास्थ्य व्यवस्था
✔ बड़े पैमाने पर रोजगार
✔ विश्वस्तरीय रिसर्च और इनोवेशन
न कि केवल अल्पकालिक राहत पर आधारित मॉडल।
🔥 तीखा सवाल
क्या हम एक सक्षम, आत्मनिर्भर राष्ट्र बना रहे हैं—
या एक ऐसा समाज, जो योजनाओं पर निर्भर होकर आगे बढ़ेगा?
🔚 निष्कर्ष
भारत को तय करना होगा—
👉 “वोट बैंक आधारित राजनीति” या
👉 “विकास आधारित राष्ट्र निर्माण” दोनों साथ नहीं चल सकते। अगर प्राथमिकताएं नहीं बदलीं, तो “विकसित भारत” केवल एक नारा बनकर रह जाएगा।

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