DA में देरी से बढ़ा गुस्सा: केंद्रीय कर्मचारियों का राष्ट्रव्यापी विरोध, बकाया भुगतान की मांग तेज
केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्ता (DA) संशोधन की घोषणा में लगातार हो रही देरी अब बड़े असंतोष का कारण बनती जा रही है। इस स्थिति को देखते हुए कर्मचारी संगठनों ने बकाया DA और महंगाई राहत (DR) की तत्काल मंजूरी की मांग के साथ राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया है।
जनवरी 2026 से लागू होने वाले DA में वृद्धि की घोषणा अब तक नहीं होने से कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के बीच चिंता और नाराज़गी दोनों बढ़ गई है। एक प्रमुख कर्मचारी संगठन ने जानकारी दी है कि 16 अप्रैल 2026 को देशभर के विभिन्न सरकारी विभागों में दोपहर के समय रचनात्मक विरोध प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे।
इस विरोध की मुख्य मांग है कि 1 जनवरी 2026 से प्रभावी DA और DR की बकाया किस्तों को तुरंत जारी किया जाए। कर्मचारियों का कहना है कि यह देरी हाल के वर्षों में सबसे लंबी है, जिससे न केवल प्रशासनिक प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं बल्कि उनकी आर्थिक स्थिति पर भी सीधा असर पड़ रहा है।
कर्मचारी संगठनों का तर्क है कि DA महंगाई के खिलाफ वेतन संतुलन का एक अहम हिस्सा है, और इसमें देरी का मतलब है बढ़ती महंगाई के बीच घटती क्रय शक्ति। आमतौर पर DA साल में दो बार संशोधित किया जाता है, लेकिन इस बार जनवरी की वृद्धि पर अब तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, जिससे अनिश्चितता और बढ़ गई है।
विभिन्न विभागों जैसे डाक सेवा, आयकर, सर्वेक्षण और कृषि इकाइयों के कर्मचारी इस विरोध में शामिल होंगे, जो इस मुद्दे की व्यापकता को दर्शाता है। वहीं, सरकार की ओर से अभी तक देरी को लेकर कोई स्पष्ट समयसीमा नहीं दी गई है, हालांकि अंदरूनी स्तर पर प्रक्रिया जारी होने की बात कही जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि DA में हो रही देरी अब सिर्फ प्रशासनिक मुद्दा नहीं रह गई है, बल्कि यह सरकार और कर्मचारियों के बीच भरोसे पर भी असर डाल रही है। ऐसे समय में, जब महंगाई लगातार बढ़ रही है, समय पर DA संशोधन बेहद जरूरी माना जा रहा है।
कर्मचारी संगठनों ने यह भी मांग उठाई है कि भविष्य में ऐसी अनिश्चितता से बचने के लिए DA घोषणा की एक तय समयसीमा निर्धारित की जाए। वहीं, पेंशनभोगी भी इस मुद्दे पर कर्मचारियों के साथ खड़े हैं, क्योंकि महंगाई राहत (DR) सीधे तौर पर उनकी आय और जीवनयापन से जुड़ी हुई है।