आदरणीय "रिटायर्ड जज" महोदय देश" की "70 करोड़ आबादी" जवाब मांगती है
*आदरणीय "रिटायर्ड जज" महोदय "देश" की "70 करोड़ आबादी" जवाब मांगती है? आप दिल्ली से बाहर निकल कर किसी "सेवा केंद्र, कार्यकर्ता, जमा करता, सहारा स्टाफ" से नहीं मिले! "पोर्टल" आने के बाद "भुगतान" तो नहीं मिला, हजारों "कार्यकर्ता" बलिदान हो गए, उनकी जिंदगी वापस लौटाइए! "भुगतान" की जगह "बलिदान" किस बात की सैलरी? जब "पोर्टल्स" से "भुगतान" संभव नहीं है,"भुगतान" केवल "सहारा के काउंटर" से संभव है, आपने यह बात "सहकारिता मंत्री जी एवं आदरणीय सुप्रीम कोर्ट" को क्यों नहीं बताई? आप खामोश क्यों हैं, बताइए? "देश" बलिदान हो रहा है, एक "त्रासदी" का रूप ले लिया! केवल "सहारा" को जिम्मेदारी दो, मामला "जय हिंद"! आपको "मुख्य न्यायाधीश" महोदय को जाकर बताना चाहिए कि "देश" की जन भावना "सहारा" के साथ खड़ी है! वह "सहारा के काउंटर" से "भुगतान" लेना चाहते हैं, आपको सुझाव देना चाहिए! महोदय, आपको पता होना चाहिए,"देश" त्राहिमाम त्राहिमाम है, लाखों "कार्यकर्ता" मौत की लाइन में है! इस विवाद के षड्यंत्र ने "सहारा" की नहीं,"देश" की हत्या की है! यह "पूर्व सरकार एवं तत्कालीन न्यायपालिका" का षड्यंत्र है, जो दबाव में हुआ है! केवल "न्यायिक एवं सरकारी" अड़ंगा? "सहारा" को "सुरक्षा,"आजादी, अधिकार एवं जिम्मेदारी" दीजिए! "सहारा" की "चल एवं अचल" संपत्ति "सहारा" को दीजिए, यही एक "समाधान" का रास्ता है! "सहारा" सक्षम है, राष्ट्र समर्पित "देश" की अमूल्य धरोहर "सहारा" का गला घोटा गया है, उसको आजाद करिए! यही "कार्यकर्ता, जमा करता, संस्था एवं देश" हित में "सर्वोपरि न्याय" है!*