ED ने तांत्रिक अशोक खरात के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग की FIR दर्ज की, विदेशी ‘ग्राहक’ से भी पैसा लेने का आरोप
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने नासिक के तांत्रिक अशोक खरात उर्फ ‘कैप्टन’ और अन्य के खिलाफ 4 अप्रैल को मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया है। अब तक अशोक खरात के खिलाफ 12 FIR दर्ज हो चुकी हैं। वह फिलहाल नासिक में बलात्कार और काला जादू के आरोपों में पुलिस हिरासत में हैं। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पुष्टि की कि केंद्रीय एजेंसी खरात के बैंक लेन-देन और विशाल संपत्ति की जांच करेगी, साथ ही यूएई में अवैध धन ट्रांसफर से जुड़े अंतरराष्ट्रीय हवाला रैकेट की भी जांच होगी।
ED ने आरोपियों के खिलाफ प्रवर्तन केस सूचना रिपोर्ट (ECIR) दर्ज कर मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की है। यह मामला कथित रूप से अपराध की आय (PoC) को एक संदिग्ध वित्तीय नेटवर्क के जरिए घुमाने से जुड़ा है। एजेंसी 130 से अधिक बैंक खातों से जुड़े लेन-देन की जांच कर रही है, जो सहकारी पत संस्थाओं से संबंधित हैं, जिनमें समता नगरी पत संस्था भी शामिल है। आरोप है कि इन खातों के जरिए 63 करोड़ रुपये से अधिक का लेन-देन किया गया, जिसे धन के स्रोत को छिपाने के लिए जटिल वित्तीय ढांचे के तहत संचालित किया गया। कई खातों में अशोक खरात को नॉमिनी बताया गया है और उन्हें उनके निजी मोबाइल नंबरों से संचालित किया गया, जिससे उनके सीधे नियंत्रण की आशंका जताई जा रही है।
जांच का फोकस अशोक खरात से जुड़ी कथित विशाल रियल एस्टेट संपत्तियों पर भी है, जिनकी बाजार कीमत 200 करोड़ से 1,500 करोड़ रुपये के बीच आंकी जा रही है। अधिकारियों के मुताबिक, खरात ने अंधविश्वास का फायदा उठाकर संपत्ति मालिकों को “शाप” और “अपशकुन” का डर दिखाकर बाजार मूल्य से काफी कम कीमत पर जमीन-जायदाद खरीदने के लिए मजबूर किया। नासिक, शिरडी और पुणे में इस तरह की कई खरीदारी सामने आई हैं। मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) को यह तरीका मानसिक दबाव बनाकर जबरन या मजबूरी में संपत्ति बिकवाने की व्यापक रणनीति का हिस्सा प्रतीत हो रहा है।
ED की जांच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा पुणे के कोरेगांव पार्क में करीब 100 करोड़ रुपये की संपत्तियां हैं, जो कथित तौर पर अशोक खरात के चार्टर्ड अकाउंटेंट प्रकाश पोफळे के नाम पर हैं। इनमें 18 रो-हाउस और कई जमीन के टुकड़े शामिल हैं। जांचकर्ताओं को शक है कि ये संपत्तियां एक बड़े निवेश नेटवर्क का हिस्सा हैं, जहां असली मालिक को छिपाने के लिए सहयोगियों, रिश्तेदारों या पेशेवर मध्यस्थों के नाम का इस्तेमाल किया गया।
रिकॉर्ड के अनुसार, 2024 में पोफळे ने कोरेगांव पार्क में 18 रो-हाउस और लगभग 49 गुंठा जमीन खरीदी, जिससे इस निवेश के पैमाने पर सवाल उठे हैं। आधिकारिक दस्तावेजों में इसकी कीमत 19.56 करोड़ रुपये बताई गई है, जबकि बाजार में इसकी वास्तविक कीमत 100 करोड़ रुपये से अधिक आंकी जा रही है। इससे काले धन, टैक्स चोरी और बेनामी निवेश की आशंका और मजबूत हुई है। एजेंसी यह भी जांच रही है कि क्या पोफळे ने ‘पेशेवर मध्यस्थ’ के रूप में काम करते हुए बेनामी निवेश को सुविधाजनक बनाया और खरात के आध्यात्मिक कार्यक्रमों व परामर्श से आने वाले नकदी प्रवाह का प्रबंधन किया।
ED की जांच पुणे के मॉडल कॉलोनी में 1.2 करोड़ रुपये के एक लग्जरी फ्लैट तक भी पहुंची है, जो खरात की बेटी सृष्टि खरात के नाम पर है, लेकिन इसके भुगतान का कोई वैध स्रोत नहीं मिला है। इसके अलावा, नासिक, सिन्नर और शिरडी में 52 से अधिक जमीन के टुकड़े भी जांच के दायरे में हैं।
अशोक खरात पर यह भी आरोप है कि उन्होंने अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए आध्यात्मिक मार्गदर्शन देने के नाम पर कारोबारियों से करोड़ों रुपये ठगे और तथाकथित “पूजा-पाठ” व धार्मिक परामर्श के लिए भारी फीस वसूली।