गौ माता का महत्व
गौ माता की सेवा ही, माधव सेवा है, गौ माता की रक्षा मे ही हम सब का भविष्य है अर्थात् आप सब ध्यान दीजिये जिस दिन गौ माता नहीं रहेंगी उस दिन हम सब लोग दूध दही माठा पनीर मिठाई व अन्य गेाबर कहाँ से लाएंगे गौ माता की पूजा कहाँ से करोगे जब एक छोटा सा बालक अपनी माँ का दूध नहीं पीता है या नहीं निकलता है तब हम गौ माता का दूध पिलाते है. जीवन के लिये गौ माता बहुत उपयोगी है इसलिए गौ माता की रक्षा से ही देश हस्ट पुष्ट रहेगा व गौ माता का संरक्षण होना चाहिए व सब को गौ माता की पूजा पाठ करना चाहिए अधिक से अधिक गौ पालन करना चाहिए.वेदों में गौ माता को "अघ्न्या" (न मारने योग्य), दिव्य, और समस्त सुख-समृद्धि की देवी माना गया है, जिसे 'कामधेनु' कहा जाता है। गाय को रुद्रों की माता, वसुओं की पुत्री और आदित्यों की बहन बताया गया है। वेदों में गौ को "विश्वस्य मातरम्" (विश्व की माता) और पवित्रता व पोषण का सर्वोच्च प्रतीक माना गया है।
वेदों में गौ माता के विषय में प्रमुख बातें:
अघ्न्या (अमर/वंदनीय): ऋग्वेद (01/101/15) में गाय को अघ्न्या कहा गया है, जिसका अर्थ है कि उसे कभी न मारा जाए।
कामधेनु (कामना पूर्ति): वेदों में कहा गया है कि गाय समस्त कामनाओं को पूर्ण करने वाली, दिव्य कामधेनु है।
देवताओं का वास: गाय के शरीर में 33 करोड़ देवी-देवताओं का वास माना जाता है। गाय के सींगों में भगवान शिव और विष्णु, मुख में इंद्र और शरीर के अन्य हिस्सों में दिव्य शक्तियों का वास वर्णित है।
अमृतस्य नाभि (अमृत्व का केंद्र): गाय को अमृत्व का केंद्र कहा गया है, क्योंकि उसका दूध, घी, दही, मूत्र और गोबर स्वास्थ्य और पोषण के लिए अत्यंत उपयोगी हैं।
औषधीय महत्त्व: के अनुसार, वेदों में गोमूत्र और गोमय (गोबर) को कैंसर जैसी बीमारियों को रोकने और चर्म रोगों के उपचार में अत्यंत गुणकारी माना गया है।
लक्ष्मी स्वरूपा: गाय का निवास स्थान और उसकी सेवा करना पुण्यदायक और घर में सुख-शांति लाने वाला माना जाता है।
अथर्ववेद में गाय के महत्त्व को बहुत ही विस्तृत रूप में समझाया गया है, जहाँ इसे सुख-समृद्धि का प्रतीक माना गया है। गौ माता सेव तो सब सेव जय गौ माता की 🙏❤️. Pt. POORAN LAL DUBEY