घर -घर पहुॅंच रही हैं 'पानी की डॉक्टर'
घर-घर पहुँच रही हैं 'पानी की डॉक्टर'
पानी की शुद्धता की पहरेदार बनीं स्व-सहायता समूहों की महिलाएँ
जब नारी शक्ति के हाथों में समाज की सेहत सुधारने का जिम्मा हो, तो बदलाव की लहर घर-घर तक पहुँचती है। ग्वालियर शहर में स्व-सहायता समूहों से जुड़ीं दीदियां न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति बदल रही हैं, बल्कि शहर के हजारों परिवारों को 'शुद्ध जल-स्वस्थ कल' का सुरक्षा कवच भी प्रदान कर रही हैं। जल गंगा संवर्धन एवं 'वाटर फॉर वुमेन, वूमेन फॉर वाटर' अभियान के तहत ये महिलाएँ अब साधारण गृहणी से आगे बढ़कर तकनीकी रूप से दक्ष 'अमृत मित्र' के रूप में पहचानी जा रही हैं, जो घर-घर पहुँचकर हर बूंद की शुद्धता की गारंटी दे रही हैं।
ग्वालियर नगरीय क्षेत्र में राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन के तहत गठित स्व-सहायता समूहों की 15 दीदियों को “अमृत मित्र” के रूप में चिन्हित किया गया। पिछले वित्तीय (वर्ष 2025-26) के दौरान कुल 3,270 घरों में डोर-टू-डोर जल परीक्षण किया गया। महिलाएँ पोर्टेबल किट के माध्यम से पानी के पीएच मान, टीडीएस, क्लोरीन की मात्रा और गंध जैसे महत्वपूर्ण मानकों की सफलतापूर्वक जाँच कर रही हैं। यदि किसी क्षेत्र में पानी मटमैला या मानकों के विपरीत पाया जाता है, तो ये अमृत मित्र तुरंत संबंधित विभागीय कर्मचारी को कॉल कर सूचित करती हैं ताकि समस्या का तत्काल समाधान हो सके।
अमृत 2.0 और एनयूएलएम का अनूठा संगम
राज्य शासन के नगरीय प्रशासन विभाग के दिशा-निर्देशों के तहत ग्वालियर नगर के 60 वार्डों में अमृत 2.0 और डे-एनयूएलएम के मेल से शुद्ध पेयजल प्रदान करने के लिये एक कारगर पहल हुई है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य नागरिकों को स्वस्थ जीवनशैली देना और महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है।
स्वास्थ्य के साथ रोजगार भी
इस अभियान ने दोहरे लक्ष्यों को सफलतापूर्वक प्राप्त किया है। बीमारियों से मुक्ति, दूषित जल से होने वाली गंभीर बीमारियों (जैसे टाइफाइड, हैजा) पर लगाम लगी है। साथ ही महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण को भी बढ़ावा मिला है। शासन द्वारा तय 48 रुपये प्रति नमूना की दर से इन महिलाओं को मानदेय मिल रहा है, जिससे वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनी हैं।
महिलाओं को मिला आत्मविश्वास और शहर को स्वास्थ्य
वर्ष 2025-26 में मिली शानदार सफलता और नागरिकों के सकारात्मक फीडबैक को देखते हुए प्रशासन ने अब इस अभियान के अगले चरण की प्रक्रिया शुरू कर दी है। ग्वालियर की ये 'अमृत मित्र' आज इस बात का जीवंत उदाहरण हैं कि यदि महिलाओं को अवसर और तकनीक मिले, तो वे समाज की जीवनरेखा यानी 'जल' की सुरक्षा पूरी निष्ठा से कर सकती हैं। यह अभियान मात्र जल परीक्षण नहीं है, बल्कि महिलाओं के आत्मविश्वास और शहर के स्वास्थ्य के परीक्षण में सफल होने की कहानी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की मंशा के अनुरूप यह अभियान महिला सशक्तिकरण को साकार कर रहा है।
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