जालौन में 'यमराज' ढो रहे हैं मासूमों को: पाठक सैनिक क्लासेज बना मौत का जंक्शन?
उरई (जालौन): जनपद जालौन से एक ऐसी खबर आ रही है जो आपके कलेजे को छलनी कर देगी। क्या प्रशासन ने मासूम बच्चों की जान का सौदा कर लिया है? क्या जिला मुख्यालय के हुक्मरानों की रगों में दौड़ रहा खून सफेद पड़ चुका है? चंद दिनों पहले हुए खौफनाक हादसे में मासूमों का खून अभी सड़क से सूखा भी नहीं था कि जालौन का प्रशासन एक और 'बलिदान' लेने को तैयार बैठा है।
पाठक सैनिक क्लासेज: शिक्षा का मंदिर या हादसों का अड्डा?
मुख्यालय स्थित पाठक सैनिक क्लासेज में नियम-कानूनों की धज्जियां नहीं उड़ाई जा रही हैं, बल्कि उनका सरेआम 'कत्ल' किया जा रहा है। यहाँ खड़े अवैध डग्गामार वाहन नहीं, बल्कि 'चलते-फिरते ताबूत' हैं।
कबाड़ में फिट हैं सांसें: जिन गाड़ियों को कबाड़खाने में होना चाहिए, उनमें आपके और हमारे घर के चिरागों को ढोया जा रहा है।
बारूद के ढेर पर बचपन: इन वैनों में अवैध रूप से फिट किए गए गैस सिलेंडर किसी भी पल फट सकते हैं। प्रशासन शायद तब जागेगा जब आसमान में मासूमों के चिथड़े उड़ेंगे!
प्रशासन की 'अंधी' आँखें और 'बहरा' सिस्टम
हैरत की बात तो यह है कि यह सब जिला मुख्यालय की नाक के नीचे हो रहा है। क्या RTO और पुलिस विभाग के अधिकारियों को ये खटारा गाड़ियाँ दिखाई नहीं देतीं? या फिर स्कूल मालिकों के 'मोटे लिफाफों' ने अफसरों की आँखों पर पट्टी बांध दी है?
"ये स्कूल बसें नहीं, यमराज के वाहन हैं। अधिकारी और स्कूल प्रबंधन मिलकर मौत का खेल खेल रहे हैं। क्या साहब को किसी और बड़ी लाश का इंतज़ार है?" — एक बेबस पिता का दर्द
वो तीखे सवाल जिनका जवाब देने में अफसरों के पसीने छूट जाएंगे:
साहब, रेट क्या है? एक मासूम की जान की कीमत क्या तय की है आपने? क्या इन अवैध डग्गामार वाहनों से होने वाली 'उगाही' बच्चों की जान से ज्यादा कीमती है?
कुंभकर्णी नींद कब टूटेगी? पिछले हादसे के बाद जो 'जांच का नाटक' हुआ था, उसका नतीजा क्या निकला? या फिर वो सिर्फ जनता का गुस्सा शांत करने का एक झुनझुना था?
सैनिक एकेडमी पर मेहरबानी क्यों? क्या यह संस्थान कानून से ऊपर है? क्यों नहीं अब तक इन खटारा गाड़ियों को क्रेन से खींचकर थाने में खड़ा किया गया?
आखिरी चेतावनी!
जालौन प्रशासन कान खोलकर सुन ले—जनता का सब्र अब टूट रहा है। अगरपाठक सैनिक क्लासेज के इन 'मौत के सौदागरों' पर तत्काल कार्रवाई नहीं हुई, तो आने वाले समय में होने वाले किसी भी खून-खराबे का जिम्मेदार सिर्फ और सिर्फ जिला प्रशासन होगा।
वक्त रहते जाग जाओ हुक्मरानों, वरना मासूमों की आह तुम्हारी कुर्सियां जलाकर राख कर देगी!